CGPSC में बड़ा बदलाव: पहली महिला अध्यक्ष रीता शांडिल्य का कार्यकाल खत्म, अब नए चेयरमैन का इंतजार

रायपुर। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) में नेतृत्व परिवर्तन हुआ है। आयोग की अध्यक्ष रीता शांडिल्य ने 8 सितंबर 2026 को 62 वर्ष की आयु पूरी कर ली। इसके साथ ही संवैधानिक प्रावधानों के तहत उनका कार्यकाल समाप्त हो गया। रीता शांडिल्य CGPSC की पहली महिला अध्यक्ष थीं। अब आयोग के नए अध्यक्ष की नियुक्ति पर सबकी नजरें टिकी हैं।
सदस्य से अध्यक्ष तक का सफर
रीता शांडिल्य ने 13 अक्टूबर 2024 को CGPSC की सदस्य के रूप में जिम्मेदारी संभाली थी। इसके बाद उन्हें आयोग के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी मिली और 30 अगस्त 2025 को उन्होंने पूर्णकालिक अध्यक्ष के रूप में कार्यभार ग्रहण किया।
2002 बैच की IAS अधिकारी रहीं रीता शांडिल्य ने प्रशासनिक सेवा के दौरान विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर काम किया। उन्होंने राजस्व और तकनीकी शिक्षा जैसे विभागों में भी जिम्मेदारियां संभालीं। प्रशासनिक अनुभव के आधार पर उन्हें लोक सेवा आयोग में महत्वपूर्ण भूमिका दी गई।
पहली महिला अध्यक्ष के तौर पर कार्यकाल
CGPSC के इतिहास में रीता शांडिल्य का कार्यकाल इसलिए महत्वपूर्ण रहा क्योंकि वह आयोग की पहली महिला अध्यक्ष बनीं। उनके नेतृत्व में आयोग की विभिन्न परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रियाओं से जुड़े कामकाज को आगे बढ़ाया गया।
उनके कार्यकाल के दौरान परीक्षा व्यवस्था में समयबद्धता, तकनीक के इस्तेमाल और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर जोर दिया गया। आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर अभ्यर्थियों के बीच भरोसा मजबूत करना भी प्रमुख चुनौतियों में शामिल रहा।
अब नए अध्यक्ष के सामने बड़ी चुनौती
रीता शांडिल्य का कार्यकाल समाप्त होने के बाद अब CGPSC के नए अध्यक्ष की नियुक्ति अहम हो गई है। राज्य लोक सेवा आयोग प्रदेश में राज्य सेवा समेत विभिन्न सरकारी पदों पर भर्ती के लिए परीक्षाओं का आयोजन करता है।
नए अध्यक्ष के सामने समय पर परीक्षा आयोजित करना, परीक्षा कैलेंडर को प्रभावी तरीके से लागू करना, परिणाम समय पर जारी करना और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना प्रमुख चुनौतियां रहेंगी।
अभ्यर्थियों की भी नए चेयरमैन पर नजर
CGPSC की आगामी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थी भी नए अध्यक्ष की नियुक्ति और उनकी कार्यशैली को लेकर उत्सुक हैं। उम्मीदवारों की सबसे बड़ी उम्मीद परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता, समयबद्ध भर्ती और निर्धारित समय पर परिणाम जारी होने को लेकर है।
ऐसे में नए अध्यक्ष के सामने CGPSC की प्रशासनिक व्यवस्था को आगे बढ़ाने के साथ-साथ आयोग की साख और अभ्यर्थियों के विश्वास को और मजबूत करने की जिम्मेदारी होगी।


