
रायपुर, 10 अप्रैल 2026। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के प्रभावी और पारदर्शी क्रियान्वयन में छत्तीसगढ़ ने उल्लेखनीय प्रगति दर्ज करते हुए देश के अग्रणी राज्यों में स्थान बनाया है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में राज्य ने कई प्रमुख मानकों पर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है।
97% सक्रिय श्रमिकों का ई-केवायसी पूर्ण
1 अप्रैल 2026 की स्थिति में राज्य के 97 प्रतिशत सक्रिय श्रमिकों का ई-केवायसी पूर्ण किया जा चुका है। इससे भुगतान प्रणाली अधिक पारदर्शी, तेज और त्रुटिरहित बनी है।
अब तक प्रदेश के 58.16 लाख श्रमिकों का ई-केवायसी तथा 11.32 लाख निर्मित परिसंपत्तियों का जियो-टैगिंग कार्य पूरा किया जा चुका है। जियो-टैगिंग के माध्यम से परिसंपत्तियों की प्रभावी मॉनिटरिंग और गुणवत्ता नियंत्रण सुनिश्चित हुआ है।

11,668 ग्राम पंचायतों में जीआईएस आधारित कार्ययोजना
वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए युक्तधारा पोर्टल के माध्यम से राज्य की 11,668 ग्राम पंचायतों में 2,86,975 कार्यों की जीआईएस आधारित योजना तैयार की गई है। इससे स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप वैज्ञानिक और सुव्यवस्थित योजना निर्माण संभव हुआ है।
मनरेगा कार्यस्थलों पर फेस ऑथेंटिकेशन आधारित एनएमएमएस (NMMS) प्रणाली लागू होने से श्रमिकों की उपस्थिति दर्ज करने की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनी है।


क्यूआर कोड से बढ़ी पारदर्शिता
ग्राम पंचायतों में लगाए गए क्यूआर कोड के माध्यम से आम नागरिक मनरेगा कार्यों की विस्तृत जानकारी सीधे प्राप्त कर सकते हैं। 1 सितंबर से अब तक लगभग 5 लाख से अधिक स्कैन दर्ज किए जा चुके हैं। इससे जनभागीदारी और पारदर्शिता को नई गति मिली है।


हर माह 7 तारीख को ‘रोजगार दिवस’
प्रदेश में प्रत्येक माह की 7 तारीख को चावल उत्सव के साथ “रोजगार दिवस” एवं “आवास दिवस” का आयोजन किया जा रहा है। इस दौरान हितग्राहियों की समस्याओं का त्वरित निराकरण, योजनाओं की जमीनी समीक्षा और प्रगति का आकलन किया जाता है।
राज्य सरकार की डिजिटल नवाचारों और पारदर्शी तंत्र पर आधारित पहल से मनरेगा न केवल रोजगार सृजन का सशक्त माध्यम बन रहा है, बल्कि ग्रामीण विकास और सुशासन की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।