
रायपुर, 10 अप्रैल 2026 | छत्तीसगढ़ शासन की नक्सल पुनर्वास नीति के तहत समाज की मुख्यधारा में लौट रहे आत्मसमर्पित युवाओं को लोकतांत्रिक व्यवस्था से जोड़ने की दिशा में सुकमा जिला प्रशासन ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। सुकमा जिले के पुनर्वास केंद्र में निवासरत 116 आत्मसमर्पित युवाओं के मतदाता परिचय पत्र (वोटर आईडी कार्ड) बनाकर उन्हें मतदान का अधिकार सुनिश्चित किया गया है।
इस पहल के साथ अब ये पुनर्वासित युवा पंच, सरपंच, जनपद सदस्य, जिला पंचायत सदस्य और विधायक सहित विभिन्न जनप्रतिनिधियों के चुनाव में अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकेंगे। साथ ही वे भविष्य में स्वयं भी चुनाव लड़ने के पात्र बन गए हैं। इसे उनके जीवन में सम्मान, अधिकार और आत्मविश्वास की नई शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।
सरकार की नीति से बदली जिंदगी

जिला प्रशासन के अनुसार छत्तीसगढ़ शासन की नक्सल पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पित युवाओं को विभिन्न शासकीय योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराया जा रहा है।
पुनर्वास केंद्र में निवासरत 116 हितग्राहियों के—
- राशन कार्ड
- जॉब कार्ड
- आधार कार्ड
- आयुष्मान कार्ड
- श्रम कार्ड पंजीयन
के साथ-साथ प्रधानमंत्री आवास योजना का सर्वे भी पूरा कराया गया है। इससे उन्हें सामाजिक सुरक्षा और आजीविका से जुड़ी योजनाओं का सीधा लाभ मिलना सुनिश्चित हुआ है।
कौशल प्रशिक्षण से आत्मनिर्भरता की दिशा में
पुनर्वासित युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से जिला प्रशासन द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में कौशल प्रशिक्षण भी प्रदान किया जा रहा है। अब तक—
- कृषि उद्यमिता प्रशिक्षण – 48 हितग्राही
- सिलाई मशीन प्रशिक्षण – 5 हितग्राही
- कृषि उद्यमी एवं राजमिस्त्री प्रशिक्षण – 265 हितग्राही
- वाहन चालक प्रशिक्षण – 14 हितग्राही
- मुर्गी पालन प्रशिक्षण – 25 हितग्राही
कुल मिलाकर 317 पुनर्वासित युवा विभिन्न प्रकार के कौशल प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं।
जिला प्रशासन की यह पहल केवल पहचान पत्र उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लोकतांत्रिक भागीदारी, सामाजिक सम्मान और आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में एक व्यापक प्रयास है। सुकमा में यह कदम दर्शाता है कि विश्वास, पुनर्वास और अवसर के माध्यम से समाज की मुख्यधारा में स्थायी परिवर्तन संभव है।