पेसा–एफआरए समन्वय के लिए जल्द बनेगी टास्क फोर्स: प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा

दो दिवसीय ‘छत्तीसगढ़ कॉमन्स कन्विनिंग’ कार्यशाला का शुभारंभ

रायपुर, 09 अप्रैल 2026। आदिम जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा ने कहा है कि पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम (पेसा) और वन अधिकार अधिनियम (एफआरए) के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में एक समर्पित टास्क फोर्स का गठन शीघ्र किया जाएगा। यह टास्क फोर्स राज्य में दोनों कानूनों के बीच संतुलित समन्वय स्थापित कर जमीनी स्तर पर बेहतर परिणाम सुनिश्चित करेगी।

उन्होंने बताया कि “छत्तीसगढ़ कॉमन्स कन्विनिंग” में विशेषज्ञों और समुदाय प्रतिनिधियों द्वारा सामने लाए गए तथ्य राज्य के नीति निर्माण में सहायक होंगे।

कॉमन्स की भूमिका: जल, जंगल, जमीन से सांस्कृतिक विरासत तक

नवा रायपुर स्थित ट्राइबल रिसर्च एंड ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट में आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ करते हुए श्री बोरा ने कहा कि जनजातीय समुदायों का साझा संसाधनों (कॉमन्स) पर अटूट विश्वास उनके सशक्तिकरण से जुड़ा है।

उन्होंने कहा कि जल, जंगल, जमीन, संस्कृति, पर्यावरण और विरासत संरक्षण एवं संवर्धन में कॉमन्स की महत्वपूर्ण भूमिका है। “न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन” की अवधारणा को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि स्थानीय समुदाय नीति क्रियान्वयन में अग्रणी भूमिका निभाते हैं।

कार्यक्रम की शुरुआत पद्मश्री से सम्मानित श्री जागेश्वर यादव, श्री पांडी राम मंडावी तथा गौर मारिया नृत्य कलाकार सुश्री लक्ष्मी सोरी के उद्बोधन से हुई, जिसमें सांस्कृतिक और पारंपरिक दृष्टिकोणों को केंद्र में रखा गया।

70 लाख एकड़ कॉमन्स भूमि पर विमर्श

इस आयोजन में छत्तीसगढ़ सहित अन्य राज्यों से 300 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया। इनमें नीति विशेषज्ञ, पंचायत प्रतिनिधि, शोधकर्ता और समुदाय के सदस्य शामिल हैं।

सम्मेलन में राज्य की लगभग 70 लाख एकड़ कॉमन्स भूमि—जिसमें वन, घास के मैदान और जल निकाय शामिल हैं—के सुशासन और सामुदायिक संरक्षण पर चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा में सामूहिक देखरेख की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।

पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण हेतु विशेष स्टूडियो

प्रमुख सचिव श्री बोरा ने बताया कि जनजातीय विरासत और प्राकृतिक संसाधनों के गहरे संबंध को देखते हुए एक विशेष स्टूडियो स्थापित करने की योजना पर कार्य किया जा रहा है। यह स्टूडियो पारंपरिक लोकगीतों, स्वदेशी वाद्य यंत्रों की धुनों के दस्तावेजीकरण, पहचान और कॉपीराइट सुरक्षा के लिए समर्पित होगा।

उन्होंने कहा कि वैश्वीकरण और आधुनिक जीवनशैली की चुनौतियों के बीच संतुलन बनाते हुए साझा ज्ञान का संरक्षण और संवर्धन आवश्यक है।

आगे की रूपरेखा

कार्यशाला के दूसरे दिन 10 अप्रैल को मुख्य सचिव श्री विकास शील जनजातीय नीति पर संवाद में शामिल होंगे, जबकि समापन सत्र में आदिम जाति विकास मंत्री श्री रामविचार नेताम की उपस्थिति प्रस्तावित है।

यह दो दिवसीय आयोजन “प्रॉमिस ऑफ कॉमन्स” पहल के अंतर्गत विभिन्न साझेदार संस्थाओं द्वारा छत्तीसगढ़ शासन के जनजातीय विकास विभाग के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है। सम्मेलन से प्राप्त सुझाव राज्य में पेसा और एफआरए के प्रभावी समन्वय और कॉमन्स संसाधनों के सतत प्रबंधन की दिशा में मार्गदर्शक सिद्ध होंगे।

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