Dharmendra Pradhan Resigns: नीट विवाद और छात्र आंदोलन के आगे झुकी सरकार, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा

नई दिल्ली, 25 जुलाई 2026: देश की राजनीति और शिक्षा जगत से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। नीट-यूजी (NEET-UG) परीक्षा विवाद और दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे भीषण छात्र आंदोलन के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने शनिवार दोपहर को अपना त्यागपत्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेज दिया और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर इसकी आधिकारिक घोषणा की।
2014 से केंद्र की सत्ता में काबिज मोदी सरकार के कार्यकाल में यह पहला ऐसा मौका है, जब किसी बड़े जन-आंदोलन के दबाव में किसी कैबिनेट मंत्री को अपना पद छोड़ना पड़ा है।
Dharmendra Pradhan Resignation Letter: इस्तीफे की चिट्ठी में क्या लिखा?
धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री को भेजे गए दो पन्नों और करीब 575 शब्दों के अपने इस्तीफे पत्र में भावुक बातें लिखी हैं। उन्होंने कहा कि पिछले 10 दिनों के घटनाक्रम ने उनके मन को बेहद व्यथित (दुखी) किया था।
“यह मेरे लिए किसी व्यक्तिगत मान-प्रतिष्ठा का विषय नहीं है, बल्कि देश के करोड़ों युवाओं के भविष्य का सवाल है। मैं नहीं चाहता कि छात्रों का भविष्य किसी भी तरह के राजनीतिक टकराव या कानूनी विवादों में उलझे, इसलिए मैं नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफा दे रहा हूँ।”
क्यों देना पड़ा धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा?
(NEET-UG 2026 Controversy)केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के पीछे मुख्य रूप से निम्नलिखित बड़े कारण रहे हैं:
- NEET-UG पेपर लीक विवाद: 3 मई 2026 को आयोजित हुई NEET परीक्षा में बड़े पैमाने पर धांधली और पेपर लीक के आरोप लगे थे, जिसके बाद देशव्यापी आक्रोश फैल गया।
- छात्रों के सुसाइड की घटनाएं: परीक्षा में गड़बड़ी और मानसिक तनाव के कारण देश के कई प्रतिभावान छात्रों द्वारा आत्महत्या करने की दुखद खबरें सामने आईं, जिसने सरकार को बैकफुट पर ला दिया।
- विपक्ष का भारी दबाव: संसद के मानसून सत्र में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और अखिलेश यादव सहित पूरे विपक्ष ने इस मुद्दे पर मोर्चा खोल रखा था और स्पष्ट कर दिया था कि जब तक शिक्षा मंत्री का इस्तीफा नहीं होगा, तब तक संसद नहीं चलने दी जाएगी।
जंतर-मंतर पर CJP का 36 दिनों से चल रहा था धरना
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की सबसे प्रमुख मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और कई छात्र संगठन पिछले 36 दिनों से दिल्ली के जंतर-मंतर पर डटे हुए थे। सीजेपी और केंद्र सरकार के बीच आज तीसरे दौर की वार्ता होने वाली थी, लेकिन उससे ठीक पहले सरकार ने इस मुख्य मांग को स्वीकार कर गतिरोध तोड़ने का प्रयास किया है।
इस्तीफे की खबर आते ही जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच खुशी की लहर दौड़ गई और जश्न मनाया जाने लगा।
आंदोलन अभी खत्म नहीं हुआ: अभिजीत दीपके (CJP Chief)
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को अपनी पहली और बड़ी जीत बताते हुए सीजेपी के प्रमुख अभिजीत दीपके ने साफ किया है कि आंदोलन अभी तुरंत खत्म नहीं होने जा रहा है। उन्होंने कहा कि उनकी दो अन्य मुख्य मांगें अभी भी अधूरी हैं, जिन पर सरकार को तुरंत फैसला लेना होगा:
- मुआवजा: नीट धांधली के कारण आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को ₹1 करोड़ का मुआवजा दिया जाए।
- केस वापसी: प्रदर्शनकारी छात्रों पर दर्ज की गईं पुलिस एफआईआर (FIR) और कानूनी मामले तुरंत वापस लिए जाएं।
- पुलिस पर एक्शन: आंदोलन के दौरान छात्रों पर लाठीचार्ज और क्रूरता करने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।
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