विशेष लेख: डिजिटल क्रांति की ओर छत्तीसगढ़, ‘वसुंधरा’ परियोजना से राजस्व सेवाओं में आएगा नया सवेरा

✍️ विशेष लेख: विष्णु प्रसाद वर्मा
सहायक संचालक, जनसंपर्क
रायपुर, 30 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ शासन के राजस्व, आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विभाग ने प्रदेश के नागरिकों को सुगम, त्वरित और पारदर्शी राजस्व सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की है। ‘वसुंधरा’ (Verified Accessible System for Unified Digital Land Records & Historical Archives) परियोजना के तहत प्रदेश के सभी जिलों और तहसीलों के पुराने एवं वर्तमान राजस्व अभिलेखों का डिजिटलीकरण, संरक्षण और प्रमाणीकरण किया जाएगा।
इस परियोजना के माध्यम से खसरा, बी-1, ऋण पुस्तिका सहित अन्य भूमि संबंधी दस्तावेज अब ऑनलाइन और व्हाट्सएप जैसे डिजिटल माध्यमों से सुरक्षित एवं पारदर्शी तरीके से नागरिकों को उपलब्ध कराए जाएंगे।
दंतेवाड़ा मॉडल बना पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणा
‘वसुंधरा’ परियोजना की नींव दंतेवाड़ा जिले में सफलतापूर्वक लागू किए गए मॉडल पर आधारित है। पिछले एक वर्ष में यहां 12 हजार से अधिक नागरिकों ने कियोस्क सेवाओं का लाभ उठाया, जबकि 15 हजार से अधिक जाति प्रमाण-पत्र केवल एक से दो दिनों में जारी किए गए। इसके साथ ही सैकड़ों विवादित मामलों का त्वरित निराकरण हुआ और अभिलेखों में छेड़छाड़ का कोई मामला सामने नहीं आया।
12.89 करोड़ पृष्ठ होंगे डिजिटल
दंतेवाड़ा की सफलता के बाद अब पूरे प्रदेश में लगभग 12 करोड़ 89 लाख पृष्ठों के राजस्व अभिलेखों का डिजिटलीकरण किया जाएगा। इसके अंतर्गत खसरा पांचसाला, बी-1 रिकॉर्ड, नामांतरण एवं संशोधन पंजी, मिसल पंजी, अधिकार अभिलेख सहित निस्तार पत्रक, वाजिब-उल-अर्ज, रीनंबरिंग सूची, साधारण खसरा और नजूल शीट जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों को भी डिजिटल स्वरूप में सुरक्षित किया जाएगा।
65.41 करोड़ रुपये की परियोजना
इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए 65.41 करोड़ रुपये की पूंजीगत लागत (CAPEX) निर्धारित की गई है, जबकि प्रतिवर्ष 50 लाख रुपये परिचालन व्यय (OPEX) के रूप में खर्च किए जाएंगे। योजना के तहत राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) के सहयोग से अगले तीन महीनों में वसुंधरा पोर्टल और मोबाइल ऐप विकसित किए जाएंगे। इसके बाद एक वर्ष के भीतर पूरे प्रदेश के अभिलेखों का डिजिटलीकरण और सत्यापन पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
AI और ब्लॉकचेन से होगी सुरक्षा
‘वसुंधरा’ परियोजना को अत्याधुनिक तकनीकों से लैस किया जा रहा है। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित OCR, डॉक्यूमेंट क्लासिफिकेशन, स्मार्ट सर्च इंजन, डिजिटल हस्ताक्षर, QR कोड और ब्लॉकचेन तकनीक का उपयोग किया जाएगा। इससे दशकों पुराने दस्तावेज भी कुछ ही सेकंड में खोजे जा सकेंगे और रिकॉर्ड में छेड़छाड़ की संभावना लगभग समाप्त हो जाएगी।
दफ्तरों के चक्कर से मिलेगी राहत
परियोजना के पूरी तरह लागू होने के बाद राजस्व अभिलेखों की नकल प्राप्त करने में लगने वाला 3 से 7 दिनों का समय घटकर कुछ मिनटों में सिमट जाएगा। नागरिक वेब पोर्टल, मोबाइल ऐप, लोक सेवा केंद्र और कियोस्क के माध्यम से 24 घंटे प्रमाणित दस्तावेज प्राप्त कर सकेंगे। ऑनलाइन भुगतान और रियल-टाइम मॉनिटरिंग जैसी सुविधाओं से सेवाएं और अधिक पारदर्शी बनेंगी।
छत्तीसगढ़ सरकार की यह पहल न केवल भूमि विवादों और फर्जीवाड़े पर प्रभावी अंकुश लगाने में मददगार होगी, बल्कि डिजिटल गवर्नेंस और सुशासन की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकती है।
लेखक: विष्णु प्रसाद वर्मा, सहायक संचालक, जनसंपर्क।




