
रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित CGPSC घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए बलरामपुर-रामानुजगंज के एडिशनल कलेक्टर और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के तत्कालीन OSD चेतन बोरघरिया को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तारी के बाद उन्हें विशेष अदालत में पेश किया गया, जहां कोर्ट ने 6 दिन की ED रिमांड मंजूर की है।
ED के अनुसार, जांच के दौरान चेतन बोरघरिया के बैंक खातों में 170 अलग-अलग ट्रांजेक्शन के जरिए 66.64 लाख रुपये नकद जमा होने की जानकारी सामने आई है। एजेंसी इन लेन-देन के स्रोत और CGPSC परीक्षा में कथित गड़बड़ी से इनके संबंधों की जांच कर रही है।

उत्कर्ष चंद्राकर से कथित वित्तीय लेन-देन
ED की जांच में चेतन बोरघरिया और उत्कर्ष चंद्राकर के बीच कथित वित्तीय लेन-देन का भी पता चला है। एजेंसी के मुताबिक, जब्त मोबाइल और अन्य डिजिटल डिवाइस की फोरेंसिक जांच में दोनों के बीच हुई WhatsApp चैट सामने आई है।
ED का दावा है कि चैट में पैसों के लेन-देन, भुगतान और रकम वापस करने से जुड़ी बातचीत शामिल है। एजेंसी इन चैट और बैंकिंग रिकॉर्ड को कथित मनी ट्रेल से जोड़कर जांच कर रही है।
मैरिज पैलेस में प्रश्नपत्र बांटने का आरोप
ED के मुताबिक, CGPSC राज्य सेवा परीक्षा 2021 में कुछ अभ्यर्थियों को परीक्षा से पहले कथित तौर पर प्रश्नपत्र उपलब्ध कराया गया था। एजेंसी का दावा है कि प्रारंभिक परीक्षा से पहले रायपुर स्थित सिद्धि विनायक मैरिज पैलेस में अभ्यर्थियों को प्रश्नपत्र बांटे गए।
इसके बाद अभ्यर्थियों को बरनवापारा अभयारण्य के एक रिसॉर्ट में ठहराकर मुख्य परीक्षा के कथित लीक प्रश्नपत्र के आधार पर तैयारी कराए जाने की बात भी जांच में सामने आई है।
3 करोड़ रुपये से अधिक की कथित अवैध रकम
ED के अनुसार, उत्कर्ष चंद्राकर, अनिल चंद्राकर और डॉ. विकास चंद्राकर ने CGPSC राज्य सेवा परीक्षा 2021 के कुछ अभ्यर्थियों से 3 करोड़ रुपये से अधिक की कथित अवैध रकम जुटाई।
जांच एजेंसी का आरोप है कि अभ्यर्थियों को परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने और चयन कराने का भरोसा दिया गया था। इसके लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री कार्यालय में संपर्क और प्रभाव होने का कथित तौर पर इस्तेमाल किया गया।
ED का कहना है कि इन दावों के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री कार्यालय में OSD रहे चेतन बोरघरिया के नाम और उनके आधिकारिक पद का कथित रूप से इस्तेमाल किया गया।
PMLA की धारा 19 के तहत गिरफ्तारी
ED के मुताबिक, जांच के दौरान बैंकिंग लेन-देन, डिजिटल साक्ष्यों और PMLA के तहत दर्ज बयानों से चेतन बोरघरिया की कथित भूमिका सामने आई। एजेंसी ने कहा कि उनके खिलाफ अपराध से अर्जित रकम हासिल करने, रखने, छिपाने और इस्तेमाल करने से जुड़े साक्ष्य मिले हैं।
इन्हीं आधारों पर चेतन बोरघरिया को 11 सितंबर 2026 को PMLA की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया गया। वर्तमान में वह बलरामपुर-रामानुजगंज में एडिशनल कलेक्टर के पद पर पदस्थ थे।
CGPSC घोटाले में पहले भी हो चुकी हैं गिरफ्तारियां
CGPSC घोटाला मामला 2020 से 2022 के बीच हुई भर्ती प्रक्रियाओं में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है। आरोप है कि परीक्षा और इंटरव्यू प्रक्रिया में प्रभावशाली लोगों के करीबी अभ्यर्थियों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया।
मामले में CBI पहले ही तत्कालीन CGPSC अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी, उप परीक्षा नियंत्रक, चार चयनित अभ्यर्थियों और एक निजी व्यक्ति को गिरफ्तार कर चुकी है। वहीं ED कथित आर्थिक लेन-देन और मनी ट्रेल की जांच कर रही है।
करीब 30 लोगों को पूछताछ का नोटिस
ED ने कथित कैश सिंडिकेट की जांच के लिए करीब 30 लोगों को पूछताछ का नोटिस जारी किया है। इनमें कुछ अभ्यर्थियों के साथ NGO, एक बड़ी कंपनी और रिसॉर्ट संचालकों से जुड़े लोग भी शामिल बताए जा रहे हैं।
अब ED यह पता लगाने में जुटी है कि कथित तौर पर अभ्यर्थियों से जुटाई गई रकम कहां से आई, किन माध्यमों से इसका लेन-देन हुआ और यह पैसा किन-किन लोगों तक पहुंचा। चेतन बोरघरिया की रिमांड के दौरान एजेंसी बैंकिंग रिकॉर्ड, WhatsApp चैट और अन्य डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पूछताछ करेगी।

