धान की फसल पर बारिश की मार! छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए कृषि विभाग की जरूरी सलाह

रायपुर। छत्तीसगढ़ में चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ का असर दिखाई दे रहा है। राजधानी रायपुर समेत प्रदेश के कई जिलों में बारिश और तेज हवाओं का दौर जारी है। मौसम में आए इस बदलाव से किसानों की चिंता बढ़ गई है। खेतों में पककर तैयार धान की फसल को नुकसान पहुंचने की आशंका है। इसे देखते हुए कृषि मौसम विज्ञान विभाग ने किसानों, पशुपालकों और बागवानी करने वालों के लिए विशेष दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
मौसम के प्रतिकूल हालात को देखते हुए प्रशासन भी सतर्क है। एहतियात के तौर पर कुछ जिलों में स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में अवकाश घोषित किया गया है। मौसम विभाग ने आगामी दिनों में भी प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश होने की संभावना जताई है।
कोंडागांव, गरियाबंद होते हुए रायपुर की ओर बढ़ने की संभावना
मौसम संबंधी जानकारी के अनुसार, चक्रवाती तूफान का प्रभाव बस्तर क्षेत्र से होते हुए प्रदेश के अन्य हिस्सों में पहुंच रहा है। इसके कोंडागांव और गरियाबंद की ओर बढ़ते हुए रायपुर क्षेत्र को प्रभावित करने की संभावना जताई गई है। हालांकि, आगे बढ़ने के साथ तूफान के कमजोर पड़ने की संभावना भी बताई गई है।
बारिश और तेज हवाओं के कारण धान सहित अन्य खरीफ फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे मौसम की स्थिति पर नजर रखें और अपनी फसलों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाएं।
29 अक्टूबर को कई जिलों में भारी बारिश की चेतावनी
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, 29 अक्टूबर को बस्तर, बलरामपुर-रामानुजगंज, सूरजपुर, कोरिया और कोरबा जिलों में एक-दो स्थानों पर भारी से अति भारी वर्षा होने की संभावना है।
इसके अलावा मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, सरगुजा, जशपुर, रायगढ़, सक्ती, सारंगढ़-बिलाईगढ़, बिलासपुर, मुंगेली, कबीरधाम, बेमेतरा, बलौदाबाजार-भाटापारा, महासमुंद, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, राजनांदगांव, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी, बालोद, दुर्ग, धमतरी, गरियाबंद और रायपुर जिलों में अनेक स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है।
1 नवंबर तक बारिश और वज्रपात की संभावना
मौसम विभाग के मुताबिक, 30 अक्टूबर से 1 नवंबर के बीच भी प्रदेश के विभिन्न जिलों में हल्की से मध्यम वर्षा होने की संभावना है। इस दौरान मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, कोरिया, सूरजपुर, बलरामपुर-रामानुजगंज, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, कोरबा, मुंगेली, रायगढ़, जांजगीर-चांपा, सक्ती, सारंगढ़-बिलाईगढ़ और बिलासपुर सहित कई क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ बिजली गिरने की आशंका जताई गई है।
ऐसे में लोगों को खराब मौसम के दौरान सावधानी बरतने और वज्रपात की आशंका होने पर खुले मैदानों में जाने से बचने की सलाह दी गई है।
किसानों को पकी धान की फसल जल्द काटने की सलाह
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कृषि मौसम विज्ञान विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि बारिश की संभावना को देखते हुए पक चुकी धान, मक्का और तिलहन की फसलों की जल्द कटाई कर लें। कटी हुई फसल को खुले में छोड़ने के बजाय सुरक्षित स्थान पर रखें, ताकि बारिश और तेज हवाओं से उपज को नुकसान न पहुंचे।
खेतों में खड़ी फसलों की नियमित निगरानी करने और जलभराव रोकने के लिए उचित निकासी व्यवस्था बनाने की भी सलाह दी गई है। तेज हवाओं से फसलों के गिरने की आशंका को देखते हुए किसान आवश्यक सावधानियां बरतें।
विभाग ने किसानों को फिलहाल गेहूं, चना और मसूर जैसी रबी फसलों की बुआई स्थगित रखने की सलाह दी है। मौसम साफ होने के बाद नवंबर के पहले सप्ताह में बुआई शुरू करने की सलाह दी गई है।
अनाज के सुरक्षित भंडारण पर जोर
बारिश के दौरान कृषि उपज की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए किसानों को अनाज का सुरक्षित भंडारण करने की सलाह दी गई है। अनाज को साफ, सूखे और हवादार स्थान पर रखें। भंडारण से पहले अनाज को उचित नमी स्तर तक सुखाना जरूरी है।
भंडारण स्थल की छत, फर्श और जल निकासी की व्यवस्था भी जांच लें। बीजों को सुरक्षित रखते समय उनकी अंकुरण क्षमता और कीटों से बचाव पर विशेष ध्यान दें। मौसम साफ होने तक फसलों में कीटनाशक और खरपतवारनाशक का छिड़काव नहीं करने की सलाह दी गई है।
सब्जियों और बागवानी फसलों को भी बचाने की जरूरत
तेज हवाओं और बारिश को देखते हुए सब्जी एवं बागवानी फसलों की सुरक्षा पर भी जोर दिया गया है। जिन फसलों की उपज पककर तैयार हो गई है, उनकी जल्द तुड़ाई कर सुरक्षित स्थान पर रखें या बाजार भेजने की व्यवस्था करें।
बागवानी फसलों में उर्वरकों का प्रयोग मौसम साफ होने के बाद ही करें। फूलगोभी, ब्रोकोली, चुकंदर और पत्तागोभी जैसी रबी सब्जियों की बुआई और रोपाई नवंबर के पहले सप्ताह से शुरू करने की सलाह दी गई है। फसलों में कीट या बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर मौसम अनुकूल होने के बाद ही उचित दवाओं का छिड़काव करें।
पशुओं को सुरक्षित स्थानों पर रखने की सलाह
कृषि मौसम विज्ञान विभाग ने पशुपालकों को भी सतर्क रहने को कहा है। बारिश और तेज हवाओं के दौरान पशुओं को सूखे तथा सुरक्षित स्थानों पर रखें। वज्रपात की आशंका के समय पशुओं को पेड़ों के नीचे न बांधें।
पशुओं के लिए स्वच्छ पेयजल और सूखे चारे की पर्याप्त व्यवस्था करें। हरे चारे, सूखे चारे और पशु आहार को भी बारिश से बचाकर रखें। पशुओं में सुस्ती, भूख की कमी, दस्त या सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षण दिखाई देने पर पशु चिकित्सक से संपर्क करें।
मौसम को ध्यान में रखकर करें कृषि कार्य
कृषि मौसम विज्ञान विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे मौसम के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार ही कृषि कार्यों की योजना बनाएं। खेतों में जल निकासी की व्यवस्था दुरुस्त रखें और पकी फसलों की कटाई व भंडारण में देरी न करें।
तेज बारिश, आंधी और वज्रपात के दौरान खेतों में अनावश्यक रूप से जाने से बचें। समय पर सावधानी बरतकर किसान अपनी फसलों, कृषि उपज और पशुधन को खराब मौसम से होने वाले संभावित नुकसान से काफी हद तक बचा सकते हैं।

