
रायपुर। छत्तीसगढ़ में चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ का असर अभी पूरी तरह खत्म भी नहीं हुआ है कि अब एक और चक्रवाती तूफान ‘मुरासु’ ने चिंता बढ़ा दी है। बंगाल की खाड़ी में सक्रिय यह तूफान गंभीर चक्रवाती तूफान में तब्दील हो चुका है। मौसम विभाग के अनुसार, इसका असर छत्तीसगढ़ के कई जिलों में देखने को मिल सकता है। खासकर बस्तर संभाग के पांच जिलों में 3 नवंबर को भारी बारिश की संभावना जताई गई है। इसे लेकर मौसम विभाग ने ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।
बंगाल की खाड़ी में सक्रिय हुआ गंभीर चक्रवाती तूफान
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, पश्चिम-मध्य और उससे सटे दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में बना चक्रवाती तूफान ‘मुरासु’ पिछले छह घंटों के दौरान करीब 20 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ा है। इसकी तीव्रता बढ़ने के बाद यह गंभीर चक्रवाती तूफान में बदल गया है।
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, तूफान के 2 नवंबर की आधी रात से 3 नवंबर की सुबह के बीच दक्षिणी आंध्र प्रदेश के तट पर नेल्लोर और नरसापुर के बीच ओंगोल के पास पहुंचने की संभावना है। इस दौरान हवा की रफ्तार 100 से 110 किलोमीटर प्रति घंटे तक रह सकती है, जबकि तेज झोंकों के साथ इसकी गति 120 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने का अनुमान है।
छत्तीसगढ़ के इन 5 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी
चक्रवाती तूफान ‘मुरासु’ का असर छत्तीसगढ़ के दक्षिणी हिस्सों में भी पड़ सकता है। मौसम विभाग ने 3 नवंबर को सुकमा, बीजापुर, दंतेवाड़ा, बस्तर और नारायणपुर जिले में भारी बारिश की संभावना जताते हुए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।
वहीं, प्रदेश के 10 से अधिक अन्य जिलों में भी मौसम का असर देखने को मिल सकता है। इन इलाकों में तेज हवाओं के साथ हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। मौसम में बदलाव को देखते हुए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
धान की फसल को लेकर किसानों की बढ़ी चिंता
प्रदेश में धान कटाई का सीजन शुरू होने वाला है। ऐसे में लगातार बदलते मौसम ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी है। इससे पहले चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ के प्रभाव से हुई बारिश के कारण कई इलाकों में फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका बनी थी। अब मुरासु तूफान के चलते फिर बारिश की चेतावनी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है।
खेतों में तैयार खड़ी धान की फसल और कटाई के बाद खुले में रखी उपज पर बारिश का असर पड़ सकता है। ऐसे में किसानों को सलाह दी जा रही है कि वे कटी हुई फसल और धान को सुरक्षित स्थान पर रखें तथा मौसम विभाग की चेतावनी पर नजर बनाए रखें।
लोगों को सतर्क रहने की सलाह
मौसम खराब होने के दौरान लोगों को अनावश्यक रूप से घर से बाहर निकलने से बचना चाहिए। गरज-चमक और आकाशीय बिजली की स्थिति में खुले मैदान, पेड़ और बिजली के खंभों से दूर सुरक्षित स्थान पर रहना चाहिए। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को जलभराव की आशंका को लेकर भी सतर्क रहने की जरूरत है।
फिलहाल मौसम विभाग की चेतावनी के बाद बस्तर संभाग के जिलों में मौसम पर नजर रखी जा रही है। आने वाले दिनों में बारिश की स्थिति के अनुसार किसानों और आम नागरिकों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होगी।
