
रायपुर, 10 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ सरकार ने वर्ष 2023 के तेन्दूपत्ता संग्रहण के लिए संग्राहकों को प्रोत्साहन पारिश्रमिक (बोनस) का वितरण शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पहल और वन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में यह राशि सीधे संग्राहकों के बैंक खातों में ऑनलाइन हस्तांतरित की जा रही है। इस व्यवस्था से भुगतान प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, सरल और समयबद्ध बनी है।
राज्य स्तरीय सहकारिता सप्ताह एवं अंतरराष्ट्रीय सहकारिता दिवस के अवसर पर 3 जुलाई से शुरू हुई इस प्रक्रिया के तहत धरमजयगढ़ जिला वनोपज सहकारी यूनियन के 46 हजार 840 तेन्दूपत्ता संग्राहकों को कुल 17 करोड़ 43 लाख रुपये का बोनस दिया जा रहा है। राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजी जा रही है, जिससे उन्हें बिना किसी अतिरिक्त प्रक्रिया के समय पर आर्थिक सहायता मिल रही है।
वनमंडलाधिकारी एवं पदेन प्रबंध संचालक, जिला वनोपज सहकारी यूनियन मर्यादित धरमजयगढ़ के अनुसार जिले की 58 प्राथमिक वनोपज सहकारी समितियों के माध्यम से बोनस वितरण किया जा रहा है। वर्ष 2023 के संग्रहण सत्र में जिला यूनियन की 59 समितियों के जरिए कुल 70,945.485 मानक बोरा तेन्दूपत्ता संग्रहित किया गया था। इसी संग्रहण के आधार पर पात्र संग्राहकों को प्रोत्साहन पारिश्रमिक का लाभ दिया जा रहा है।
अधिकारियों के अनुसार बोनस वितरण का उद्देश्य तेन्दूपत्ता संग्राहकों की आय में वृद्धि करना और उनके आर्थिक सशक्तीकरण को बढ़ावा देना है। राज्य सरकार की यह पहल विशेष रूप से वनांचल और आदिवासी क्षेत्रों के उन परिवारों के लिए महत्वपूर्ण है, जिनकी आजीविका का प्रमुख स्रोत लघु वनोपज संग्रहण है।
बोनस वितरण में विभिन्न प्राथमिक वनोपज सहकारी समितियों को उनके संग्रहण और प्रदर्शन के आधार पर अलग-अलग दर से प्रोत्साहन राशि मिली है। इनमें प्राथमिक वनोपज सहकारी समिति बोरो को सबसे अधिक 4,710.58 रुपये प्रति मानक बोरा की दर से बोनस प्राप्त हुआ है। इसके बाद प्राथमिक समिति रायमेर को 4,616.76 रुपये प्रति मानक बोरा की दर से प्रोत्साहन पारिश्रमिक मिला है। इससे संबंधित समितियों के संग्राहकों को भी अधिक आर्थिक लाभ प्राप्त होगा।
वन विभाग ने बोनस वितरण के लिए प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) प्रणाली अपनाई है। इसके तहत पूरी राशि सीधे हितग्राहियों के बैंक खातों में भेजी जा रही है। इस व्यवस्था से भुगतान में पारदर्शिता बढ़ी है, बिचौलियों की भूमिका समाप्त हुई है और लाभार्थियों को समय पर राशि मिलना सुनिश्चित हुआ है।
बोनस प्राप्त करने वाले संग्राहकों ने राज्य सरकार के इस कदम का स्वागत किया है। उनका कहना है कि यह अतिरिक्त राशि खेती-किसानी के कार्यों, बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों तथा अन्य घरेलू खर्चों को पूरा करने में सहायक होगी। समय पर मिली आर्थिक सहायता से परिवारों को राहत मिलने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों की आर्थिक गतिविधियों को भी बल मिलेगा।
छत्तीसगढ़ देश के प्रमुख तेन्दूपत्ता उत्पादक राज्यों में शामिल है, जहां लाखों ग्रामीण और आदिवासी परिवार हर वर्ष तेन्दूपत्ता संग्रहण से अपनी आजीविका अर्जित करते हैं। ऐसे में संग्रहण के बाद मिलने वाला प्रोत्साहन पारिश्रमिक उनके लिए अतिरिक्त आय का महत्वपूर्ण स्रोत होता है।
राज्य सरकार का मानना है कि तेन्दूपत्ता संग्राहकों को समय पर बोनस उपलब्ध कराने से न केवल उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, बल्कि वनाधारित आजीविका को भी बढ़ावा मिलेगा। साथ ही डिजिटल भुगतान व्यवस्था के माध्यम से सरकारी योजनाओं का लाभ पारदर्शी और प्रभावी तरीके से अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने की दिशा में भी यह पहल महत्वपूर्ण साबित हो रही है।