दुर्ग में स्वच्छता अभियान को नई ताकत, 3360 सोख्ता गड्ढों से होगा जल संरक्षण

रायपुर, 01 सितंबर 2026। ग्रामीण क्षेत्रों में घरेलू गंदे पानी यानी ग्रे-वाटर के सुरक्षित प्रबंधन को लेकर दुर्ग जिले में जनभागीदारी का अनूठा उदाहरण देखने को मिल रहा है। ‘मोर गांव मोर पानी’ अभियान के तहत स्व-सहायता समूहों की महिलाओं और स्वच्छताग्राहियों ने श्रमदान कर अब तक 3360 सोख्ता गड्ढों (सोक पिट) का निर्माण किया है।
इस अभियान का मुख्य उद्देश्य घरों से निकलने वाले गंदे पानी को गलियों, रास्तों और सार्वजनिक स्थानों पर खुले में बहने से रोकना है। इससे गांवों में गंदगी और जलजनित बीमारियों की रोकथाम के साथ पानी के प्राकृतिक निस्तारण और भू-जल पुनर्भरण को भी बढ़ावा मिलेगा।
जिला पंचायत दुर्ग के मुख्य कार्यपालन अधिकारी बजरंग कुमार दुबे ने बताया कि ‘मोर गांव मोर पानी’ अभियान के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में ग्रे-वाटर के सुरक्षित प्रबंधन के लिए जनभागीदारी को प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने कहा कि महिलाओं द्वारा स्वयं आगे बढ़कर अपने घरों से अभियान की शुरुआत करना पूरे ग्रामीण समुदाय के लिए प्रेरणादायक उदाहरण है।
‘पहले खुद से शुरुआत’ बनी अभियान की पहचान
इस पहल की सबसे खास बात यह है कि स्व-सहायता समूहों की महिलाओं ने ‘नेतृत्व परिवर्तन और स्वयं से शुरुआत’ की थीम के साथ अपने घरों से बदलाव की शुरुआत की। 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर शुरू हुए अभियान को अपशिष्ट जल प्रबंधन सप्ताह के रूप में आगे बढ़ाया गया।
महिलाओं ने संकल्प लिया कि यदि उनके घरों से निकलने वाला गंदा पानी खुले में बह रहा है, तो सबसे पहले वे अपने घर के आसपास सोख्ता गड्ढे का निर्माण करेंगी। इसके बाद अन्य ग्रामीण परिवारों को भी इस पहल से जुड़ने और सुरक्षित जल निकासी व्यवस्था अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।
श्रमदान से तैयार हो रहे सोख्ता गड्ढे
अभियान पूरी तरह जनभागीदारी और श्रमदान पर आधारित है। स्वच्छताग्राहियों और स्व-सहायता समूहों की महिलाओं ने आपसी सहयोग से घरों के आसपास लगभग 2 से 3 फीट गहरे सोख्ता गड्ढे तैयार किए।
इन गड्ढों के निर्माण में स्थानीय स्तर पर उपलब्ध ईंट, पत्थर और कंकड़ जैसी सामग्री का उपयोग किया गया है। इससे घरेलू पानी सुरक्षित रूप से जमीन में समा सकेगा और भू-जल पुनर्भरण में मदद मिलेगी।
सेप्टिक टैंक के ओवरफ्लो पानी का भी होगा सुरक्षित निस्तारण
अभियान का दायरा केवल सामान्य घरेलू ग्रे-वाटर तक सीमित नहीं रखा गया है। ऐसे ग्रामीण परिवारों को भी अभियान से जोड़ा गया है, जिनके घरों में सेप्टिक टैंक युक्त शौचालय हैं और टैंक के ओवरफ्लो होने से गंदा पानी खुले में बह रहा था।
ऐसे स्थानों पर विशेष सोक पिट और सोख्ता गड्ढों के माध्यम से पानी के सुरक्षित निस्तारण की व्यवस्था की जा रही है।
तकनीकी मार्गदर्शन और सतत मॉनिटरिंग
सोख्ता गड्ढों का निर्माण तकनीकी रूप से सही तरीके से हो, इसके लिए जनपद पंचायत स्तर पर मुख्य कार्यपालन अधिकारी, करारोपण अधिकारी, कार्यक्रम अधिकारी, विकासखंड समन्वयक और तकनीकी सहायकों द्वारा स्व-सहायता समूहों की महिलाओं को प्रशिक्षण और मार्गदर्शन दिया जा रहा है।
गांवों के संकुल बनाकर नोडल अधिकारियों की नियुक्ति भी की गई है। ये अधिकारी अभियान की सतत मॉनिटरिंग करने के साथ विभिन्न विभागों के बीच समन्वय सुनिश्चित कर रहे हैं।
स्वच्छता और जल संरक्षण को मिल रही मजबूती
दुर्ग जिले में ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन को मजबूत करने के लिए पहले भी ग्राम पंचायतों में वर्मी और नाडेप संरचनाओं की सफाई, कचरे का पृथक्करण तथा सार्वजनिक जलस्रोतों के आसपास स्वच्छता अभियान चलाए जा चुके हैं। ग्रे-वाटर प्रबंधन की यह नई पहल इन प्रयासों को और मजबूती प्रदान कर रही है।
जिला प्रशासन और स्व-सहायता समूहों की इस पहल से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता, जल संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण को लेकर जागरूकता बढ़ रही है। साथ ही, स्व-सहायता समूहों की महिलाएं जनभागीदारी और महिला सशक्तिकरण की प्रभावी मिसाल भी प्रस्तुत कर रही हैं।

