168 एकड़ जमीन खरीद विवाद में फंसे CM मोहन यादव, कांग्रेस-बीजेपी आमने-सामने

भोपाल/उज्जैन। मध्य प्रदेश की राजनीति में मुख्यमंत्री मोहन यादव को लेकर नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। विपक्षी दल कांग्रेस ने मुख्यमंत्री और उनके परिवार पर उज्जैन में विकास परियोजनाओं से जुड़े क्षेत्रों में बड़ी मात्रा में जमीन खरीदने का आरोप लगाया है। कांग्रेस ने मामले को गंभीर बताते हुए न्यायिक जांच की मांग की है। वहीं, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए इसे राजनीतिक और जातिगत एजेंडा बताया है।

यह विवाद एक राष्ट्रीय समाचार रिपोर्ट के सामने आने के बाद तेज हुआ, जिसमें दावा किया गया कि मुख्यमंत्री मोहन यादव के परिवार से जुड़े लोगों ने उज्जैन में करीब 168 एकड़ जमीन खरीदी है। आरोप है कि इनमें से बड़ी मात्रा में जमीन उन इलाकों में खरीदी गई है जहां भविष्य में बड़े सरकारी विकास कार्य प्रस्तावित हैं।

कांग्रेस ने लगाए गंभीर आरोप

कांग्रेस की ओर से पार्टी नेता पवन खेड़ा और मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मुख्यमंत्री मोहन यादव पर सवाल उठाए।

पवन खेड़ा ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री बनने के बाद मोहन यादव के परिवार ने उज्जैन क्षेत्र में बड़ी मात्रा में जमीन खरीदी। कांग्रेस के अनुसार 168 एकड़ में से लगभग 111 एकड़ जमीन उस क्षेत्र में खरीदी गई है जहां भविष्य में सिंहस्थ कुंभ से जुड़ी विकास योजनाएं प्रस्तावित हैं

कांग्रेस का कहना है कि उज्जैन के जिन इलाकों को 2035 मास्टर प्लान के तहत विकसित किया जाना है, उन्हीं क्षेत्रों में यह जमीन खरीदी गई है। विपक्ष ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री को भविष्य की सरकारी परियोजनाओं की जानकारी होने के कारण इस खरीद पर सवाल खड़े होते हैं।

न्यायिक जांच की मांग

कांग्रेस नेताओं ने इस पूरे मामले की स्वतंत्र न्यायिक जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि अगर सरकारी योजनाओं की जानकारी का इस्तेमाल निजी जमीन खरीद के लिए किया गया है तो यह गंभीर हितों के टकराव का मामला हो सकता है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस ने कहा कि उज्जैन देश का बड़ा धार्मिक केंद्र है और सिंहस्थ कुंभ जैसे आयोजनों से करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था जुड़ी होती है। ऐसे में विकास योजनाओं से जुड़े क्षेत्रों में जमीन खरीद की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

बीजेपी ने आरोपों को बताया राजनीति से प्रेरित

दूसरी ओर बीजेपी ने कांग्रेस के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि विपक्ष बिना ठोस सबूतों के मुख्यमंत्री की छवि खराब करने की कोशिश कर रहा है।

बीजेपी की तरफ से यह भी कहा गया कि कांग्रेस राजनीतिक लाभ के लिए लगातार व्यक्तिगत आरोपों का सहारा ले रही है। पार्टी ने कांग्रेस पर जातिवादी राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि यह मुद्दा तथ्यों से ज्यादा राजनीतिक प्रचार का हिस्सा है।

मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं

अब तक इस पूरे विवाद पर मुख्यमंत्री मोहन यादव या मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। राजनीतिक गलियारों में इस मामले को लेकर चर्चा तेज है और विपक्ष लगातार सरकार पर जवाब देने का दबाव बना रहा है।

उज्जैन विकास परियोजनाओं पर केंद्रित है विवाद

दरअसल, उज्जैन आने वाले वर्षों में कई बड़े धार्मिक और बुनियादी ढांचा विकास परियोजनाओं का केंद्र बनने जा रहा है। सिंहस्थ कुंभ और 2035 मास्टर प्लान के तहत शहर के विस्तार और विकास को लेकर कई योजनाओं पर काम प्रस्तावित है।

इसी वजह से जमीन खरीद को लेकर उठे सवालों ने राजनीतिक रूप ले लिया है। फिलहाल मामला आरोप और प्रत्यारोप के दौर में है, जबकि सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि सरकार या मुख्यमंत्री इस विवाद पर आगे क्या आधिकारिक प्रतिक्रिया देते हैं।

फिलहाल यह मुद्दा मध्य प्रदेश की राजनीति में बड़ा विवाद बन चुका है और आने वाले दिनों में इस पर सियासी टकराव और बढ़ने के संकेत हैं।

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