
रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) के उपयोग को बढ़ावा देने और चार्जिंग सुविधाओं को अधिक सुलभ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। इसी उद्देश्य से बुधवार को मंत्रालय में सचिव सह-परिवहन आयुक्त एस. प्रकाश की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में राज्यभर में ईवी चार्जिंग नेटवर्क के विस्तार, चार्जिंग स्टेशनों की उपलब्धता बढ़ाने और उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित करने पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक में परिवहन विभाग, ऊर्जा विभाग, सभी क्षेत्रीय एवं जिला परिवहन अधिकारियों (आरटीओ/डीटीओ), हिंदुस्तान पेट्रोलियम (एचपीसीएल), भारत पेट्रोलियम (बीपीसीएल), इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल), जियो-बीपी, इलेक्ट्रिक वाहन निर्माता कंपनियों तथा क्षेत्र के विशेषज्ञों ने भाग लिया।
बैठक में बताया गया कि वर्तमान में विभिन्न कंपनियां अपने-अपने अलग मोबाइल एप के माध्यम से चार्जिंग स्टेशन की जानकारी उपलब्ध कराती हैं। इससे इलेक्ट्रिक वाहन उपयोगकर्ताओं को अलग-अलग एप डाउनलोड करने पड़ते हैं और आवश्यक जानकारी प्राप्त करने में असुविधा होती है। इस समस्या के समाधान के लिए राज्य सरकार एक ऐसा एकीकृत प्लेटफॉर्म या मोबाइल एप विकसित करने की तैयारी कर रही है, जहां विभिन्न कंपनियों के चार्जिंग स्टेशनों की जानकारी एक ही स्थान पर उपलब्ध होगी।
अधिकारियों ने बताया कि भारत सरकार भी देशभर के लिए एक यूनिवर्सल ईवी चार्जिंग एप विकसित कर रही है। इसके साथ ही ऊर्जा विभाग पहले से ही चिप्स (CHiPS) के सहयोग से एक पायलट एप पर कार्य कर रहा है। भविष्य में इन प्रयासों के समन्वय से उपभोक्ताओं को बेहतर डिजिटल सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जाएगा।
बैठक में केंद्र सरकार की पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने के लिए उपलब्ध वित्तीय सहायता तथा छत्तीसगढ़ इलेक्ट्रिक वाहन नीति-2022 के अंतर्गत दिए जा रहे प्रोत्साहनों की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने संबंधित विभागों और निजी कंपनियों के साथ समन्वय बनाकर चार्जिंग नेटवर्क के विस्तार की रणनीति पर चर्चा की।
सचिव सह-परिवहन आयुक्त एस. प्रकाश ने सभी जिला परिवहन अधिकारियों और क्षेत्रीय परिवहन अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने के लिए उपयुक्त स्थानों की शीघ्र पहचान करें। इसके साथ ही आवश्यक अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) जारी करने की प्रक्रिया को भी तेज करने के निर्देश दिए गए, ताकि नई परियोजनाओं में अनावश्यक विलंब न हो।
बैठक के दौरान एचपीसीएल, बीपीसीएल, आईओसीएल और जियो-बीपी के प्रतिनिधियों ने राज्य में वर्तमान में संचालित तथा प्रस्तावित ईवी चार्जिंग स्टेशनों की जानकारी साझा की। उन्होंने आने वाले समय में चार्जिंग नेटवर्क का विस्तार करने की अपनी योजनाओं से भी अधिकारियों को अवगत कराया। बैठक में निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देने और सार्वजनिक स्थानों पर अधिक चार्जिंग स्टेशन विकसित करने पर भी चर्चा हुई।
सचिव सह-परिवहन आयुक्त एस. प्रकाश ने कहा कि इलेक्ट्रिक वाहनों के बढ़ते उपयोग को देखते हुए मजबूत और विश्वसनीय चार्जिंग नेटवर्क विकसित करना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि यदि लोगों को चार्जिंग स्टेशनों की सही और समय पर जानकारी आसानी से उपलब्ध होगी, तो इलेक्ट्रिक वाहन अपनाने में उनकी झिझक भी कम होगी। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य चार्जिंग सुविधाओं को अधिक सुलभ, व्यवस्थित और उपयोगकर्ता अनुकूल बनाना है।
उन्होंने यह भी कहा कि इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने से न केवल स्वच्छ और हरित परिवहन को प्रोत्साहन मिलेगा, बल्कि वायु प्रदूषण में कमी लाने और पर्यावरण संरक्षण के लक्ष्य को भी मजबूती मिलेगी। राज्य सरकार इसी दिशा में चरणबद्ध तरीके से चार्जिंग नेटवर्क का विस्तार कर रही है, ताकि शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ अन्य जिलों में भी ईवी उपयोगकर्ताओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हो सकें।
राज्य सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले समय में छत्तीसगढ़ के सभी प्रमुख शहरों, राष्ट्रीय एवं राज्य राजमार्गों तथा महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्थानों पर पर्याप्त संख्या में ईवी चार्जिंग स्टेशन उपलब्ध हों। इसके साथ ही एकीकृत एप के माध्यम से नागरिकों को चार्जिंग स्टेशनों की वास्तविक समय की जानकारी आसानी से मिल सके, जिससे इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग और अधिक सुविधाजनक बन सके।