
रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य के विकास कार्यों की निगरानी को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और परिणाम आधारित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए छत्तीसगढ़ एसडीजी (सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स) 2.0 फ्रेमवर्क का शुभारंभ किया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बुधवार को मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित कार्यक्रम में राज्य नीति आयोग द्वारा तैयार इस फ्रेमवर्क का विमोचन किया। इस अवसर पर एसडीजी राज्य एवं जिला संकेतक फ्रेमवर्क 2.0, मेटाडेटा हैंडबुक तथा बस्तर के समग्र विकास के लिए तैयार की गई ‘बस्तर अंजोर’ पहल का भी शुभारंभ किया गया।
कार्यक्रम में मंत्रिपरिषद के सदस्य, राज्य नीति आयोग के पदाधिकारी और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे। सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था से योजनाओं की प्रगति का आकलन अधिक सटीक तरीके से किया जा सकेगा और नीति निर्माण में विश्वसनीय आंकड़ों का उपयोग बढ़ेगा।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए केवल योजनाएं बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका प्रभावी क्रियान्वयन और परिणामों की नियमित समीक्षा भी उतनी ही आवश्यक है। उन्होंने कहा कि एसडीजी 2.0 फ्रेमवर्क शासन को साक्ष्य आधारित नीति निर्माण, विभागों के बीच बेहतर समन्वय और योजनाओं की प्रभावी मॉनिटरिंग के लिए मजबूत आधार उपलब्ध कराएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य विकास योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि नई व्यवस्था के माध्यम से विकास कार्यों को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और मापनीय बनाया जाएगा। उनके अनुसार यह पहल ‘विकसित छत्तीसगढ़ @2047’ के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
सरकार ने एसडीजी 2.0 फ्रेमवर्क के तहत विकास की निगरानी के लिए संकेतकों की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि की है। राज्य स्तर पर संकेतकों की संख्या 275 से बढ़ाकर 343 तथा जिला स्तर पर 82 से बढ़ाकर 99 कर दी गई है। इससे विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों की प्रगति का अधिक व्यापक और वैज्ञानिक मूल्यांकन किया जा सकेगा।
इसके साथ ही जारी की गई मेटाडेटा हैंडबुक में प्रत्येक संकेतक की गणना की पद्धति, डेटा संग्रहण और रिपोर्टिंग प्रणाली को मानकीकृत किया गया है। सरकार का मानना है कि इससे पूरे राज्य में विकास संबंधी आंकड़ों की गुणवत्ता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता सुनिश्चित होगी।
कार्यक्रम के दौरान राज्य नीति आयोग के उपाध्यक्ष गणेश शंकर मिश्रा ने ‘बस्तर अंजोर’ पहल की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि यह बस्तर संभाग के समावेशी, अभिसरण आधारित और परिणामोन्मुख विकास के लिए तैयार किया गया विशेष मॉडल है। इसका उद्देश्य विभिन्न योजनाओं के बेहतर समन्वय के माध्यम से बस्तर को देश के सबसे विकसित जनजातीय क्षेत्रों में शामिल करना है।
उन्होंने बताया कि ‘बस्तर अंजोर’ का 3+4 मॉडल जिला स्तर की तीन प्रमुख पहलों—नियद नेल्लानार 2.0, बस्तर मुन्ने और स्वस्थ बस्तर—को चार प्रमुख राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय विकास ढांचों से जोड़ता है। इनमें सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स (एसडीजी)-2030, विकसित छत्तीसगढ़ @2047, आकांक्षी जिला कार्यक्रम तथा आकांक्षी विकासखंड कार्यक्रम शामिल हैं।
सरकार के अनुसार, इस मॉडल का उद्देश्य अतिरिक्त संसाधनों का उपयोग किए बिना विभिन्न विभागों और योजनाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है, ताकि शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका और आधारभूत अधोसंरचना जैसे क्षेत्रों में मापनीय और प्रभावी परिणाम प्राप्त किए जा सकें।
राज्य सरकार का मानना है कि ‘बस्तर अंजोर’ पहल अंत्योदय से सर्वोदय की भावना पर आधारित है और यह बस्तर को समावेशी, सतत तथा परिणाम आधारित विकास का राष्ट्रीय मॉडल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री अरुण साव, उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, मंत्रिपरिषद के सदस्य, मुख्य सचिव विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह सहित कई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।
सरकार का कहना है कि एसडीजी 2.0 फ्रेमवर्क और ‘बस्तर अंजोर’ जैसी पहलें राज्य में विकास योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन, पारदर्शी निगरानी और जनकल्याणकारी कार्यक्रमों की प्रभावशीलता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होंगी। आने वाले समय में इन पहलों के माध्यम से राज्य और जिला स्तर पर विकास के परिणामों का नियमित आकलन किया जाएगा, जिससे योजनाओं के प्रभाव को और अधिक मजबूत बनाया जा सके।