छत्तीसगढ़ में राजस्व सेवाओं की डिजिटल क्रांति: ‘ऑटो म्यूटेशन’ और ‘ऑटो डायवर्सन’ से जमीन संबंधी प्रक्रियाएं हुईं आसान

( विष्णु प्रसाद वर्मा, सहायक संचालक )

रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने राजस्व सेवाओं को अधिक पारदर्शी, तेज और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। राजस्व, आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विभाग द्वारा लागू की गई ‘ऑटो म्यूटेशन’ (स्वतः नामांतरण) और ‘ऑटो डायवर्सन’ (स्वतः भूमि उपयोग परिवर्तन) व्यवस्था से जमीन संबंधी सेवाओं में व्यापक बदलाव देखने को मिल रहा है। सरकार का दावा है कि इन डिजिटल व्यवस्थाओं के कारण आम नागरिकों को सरकारी दफ्तरों के बार-बार चक्कर लगाने से राहत मिली है, वहीं राजस्व सेवाओं के निस्तारण में पारदर्शिता और गति भी बढ़ी है।

पहले किसी भूमि की रजिस्ट्री होने के बाद नामांतरण कराने के लिए अलग से आवेदन करना पड़ता था। इसके बाद दस्तावेजों की जांच, भौतिक सत्यापन और विभिन्न प्रशासनिक प्रक्रियाओं के कारण कई बार लोगों को महीनों तक इंतजार करना पड़ता था। अब डिजिटल प्रणाली लागू होने के बाद अधिकांश मामलों में रजिस्ट्री के साथ ही नामांतरण की प्रक्रिया स्वतः पूरी हो रही है।

ऑटो म्यूटेशन में 99.95 प्रतिशत सफलता

राजस्व विभाग के अनुसार, राज्य में अब तक 1 लाख 40 हजार 607 पंजीकृत विलेखों में से 1 लाख 40 हजार 536 मामलों में सफलतापूर्वक ऑटो म्यूटेशन किया जा चुका है। केवल 71 मामले ही प्रक्रियाधीन हैं। इस प्रकार राज्य ने 99.95 प्रतिशत सफलता दर हासिल की है, जिसे विभाग डिजिटल राजस्व प्रशासन की बड़ी उपलब्धि मान रहा है।

इस व्यवस्था का सबसे बड़ा लाभ यह है कि नागरिकों को नामांतरण के लिए अलग से आवेदन करने की आवश्यकता नहीं पड़ती। इससे समय और धन दोनों की बचत होती है तथा भू-अभिलेख समय पर अपडेट होने से भूमि विवाद और फर्जीवाड़े की संभावनाएं भी कम होती हैं।

तकनीकी लॉक सिस्टम से बढ़ी जवाबदेही

राजस्व विभाग ने राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) के सहयोग से एक तकनीकी लॉक सिस्टम भी विकसित किया है। इसके तहत यदि किसी भूमि का पुराना ऑटो म्यूटेशन लंबित है, तो उस संपत्ति की अगली रजिस्ट्री संबंधित सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में तब तक नहीं हो सकेगी, जब तक पिछला नामांतरण पूरा नहीं हो जाता। इस व्यवस्था का उद्देश्य लंबित मामलों को कम करना और राजस्व अमले की जवाबदेही सुनिश्चित करना है।

ऑटो डायवर्सन से आसान हुई भूमि उपयोग परिवर्तन की प्रक्रिया

सरकार ने भूमि उपयोग परिवर्तन (डायवर्सन) की प्रक्रिया को भी पूरी तरह डिजिटल बनाने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। कृषि भूमि को आवासीय, व्यावसायिक अथवा औद्योगिक उपयोग में बदलने की प्रक्रिया पहले अपेक्षाकृत जटिल मानी जाती थी। आवेदन, प्रीमियम निर्धारण, शुल्क भुगतान और दस्तावेजों की जांच में काफी समय लगता था।

फरवरी से जून 2026 के बीच विभाग को 5 हजार 661 आवेदन प्राप्त हुए। इनमें से 4 हजार 739 मामलों का निस्तारण किया जा चुका है, जो 83.71 प्रतिशत सफलता दर को दर्शाता है।

विभाग के अनुसार, वर्तमान में 922 आवेदन लंबित हैं। इनमें अधिकांश मामलों में आवश्यक दस्तावेज अधूरे हैं, चालान राशि में तकनीकी त्रुटियां हैं या प्रस्तावित भूमि उपयोग नगर एवं ग्राम निवेश (टीएनसीपी) के मास्टर प्लान के अनुरूप नहीं है। विभाग का कहना है कि इन कारणों से लंबित मामलों का भी नियमानुसार निराकरण किया जा रहा है।

जिला स्तर पर बेहतर प्रदर्शन

ऑटो डायवर्सन के क्रियान्वयन में विभिन्न जिलों का प्रदर्शन भी उल्लेखनीय रहा है। कोरिया जिला 59 में से सभी 59 मामलों का निस्तारण कर 100 प्रतिशत सफलता के साथ राज्य में पहले स्थान पर रहा।

इसके अलावा कोरबा ने 98.46 प्रतिशत, मुंगेली ने 94.16 प्रतिशत, बालोद ने 93.72 प्रतिशत तथा धमतरी ने 92.73 प्रतिशत सफलता दर दर्ज करते हुए राज्य के शीर्ष पांच जिलों में स्थान बनाया। विभाग का मानना है कि इन जिलों का प्रदर्शन नियमित समीक्षा, बेहतर समन्वय और जवाबदेह प्रशासनिक व्यवस्था का परिणाम है।

डिजिटल सेवाओं को और मजबूत करने की तैयारी

राजस्व विभाग अब डिजिटल सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए कई नई तकनीकी सुविधाओं पर काम कर रहा है।

एनजीडीआरएस (NGDRS) एपीआई इंटीग्रेशन के माध्यम से अब सरकारी गाइडलाइन दरें सीधे पोर्टल से प्राप्त हो रही हैं। इससे प्रीमियम निर्धारण की प्रक्रिया पूरी तरह स्वचालित और पारदर्शी बन रही है।

इसी प्रकार ‘डायवर्टेड टू डायवर्टेड’ मॉड्यूल विकसित किया जा रहा है, जिसके माध्यम से पहले से डायवर्ट भूमि के उपयोग में परिवर्तन, जैसे आवासीय से व्यावसायिक उपयोग, का निस्तारण 15 दिनों के भीतर करने का लक्ष्य रखा गया है।

‘मल्टीपल खसरा’ मॉड्यूल के जरिए एक ही आवेदन में कई खसरों का चयन, स्वतः शुल्क निर्धारण तथा ई-चालान की सुविधा उपलब्ध होगी। विभाग ने इस सुविधा को जुलाई 2026 तक लागू करने की योजना बनाई है।

इसके अलावा ‘रिकवरी मॉड्यूल’ भी विकसित किया जा रहा है। इसके माध्यम से पुराने लंबित मामलों में पूर्व भुगतान का समायोजन, शेष प्रीमियम की गणना, भू-राजस्व एवं उपकर की मांग तथा रिकवरी की ऑनलाइन निगरानी की सुविधा उपलब्ध होगी। इसे अगस्त 2026 तक लागू करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

दिसंबर 2026 तक का रोडमैप

राजस्व विभाग ने आगामी महीनों के लिए भी व्यापक कार्ययोजना तैयार की है। इसके तहत दिसंबर 2026 तक राज्यभर में सैटेलाइट और ड्रोन आधारित भूमि मैपिंग, नगर एवं ग्राम निवेश (टीएनसीपी) की एनओसी प्रणाली का डिजिटल एकीकरण तथा मुख्य भू-अभिलेख पोर्टल का व्यापक उन्नयन किया जाएगा।

सरकार का मानना है कि इन सुधारों से किसान, गृहस्वामी, व्यापारी और औद्योगिक निवेशकों को जमीन संबंधी सेवाएं और अधिक सरल, पारदर्शी तथा समयबद्ध तरीके से उपलब्ध होंगी।

राजस्व विभाग के अनुसार, डिजिटल तकनीक आधारित यह व्यवस्था केवल प्रशासनिक सुधार तक सीमित नहीं है, बल्कि नागरिकों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल है। ऑटो म्यूटेशन, ऑटो डायवर्सन और आगामी डिजिटल मॉड्यूल्स के माध्यम से छत्तीसगढ़ राजस्व प्रशासन को आधुनिक, जवाबदेह और नागरिक-केंद्रित बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। आने वाले समय में इन पहलों के पूर्ण क्रियान्वयन के बाद राज्य डिजिटल राजस्व प्रशासन के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर एक महत्वपूर्ण मॉडल के रूप में स्थापित हो सकता है।

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