
रायपुर, 10 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री बाल संदर्भ योजना के तहत सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में कुपोषण के खिलाफ व्यापक अभियान चलाया जा रहा है। जिला प्रशासन, महिला एवं बाल विकास विभाग और स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त प्रयासों से जिले को कुपोषण मुक्त बनाने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है। इसी अभियान के तहत जून माह में जिले के विभिन्न क्षेत्रों में आयोजित 19 विशेष स्वास्थ्य शिविरों में 573 कुपोषित बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। इनमें से 45 गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों को बेहतर उपचार के लिए पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) भेजा गया है।
मुख्यमंत्री बाल संदर्भ योजना का उद्देश्य जन्म से छह वर्ष तक के गंभीर रूप से कुपोषित और स्वास्थ्य संबंधी जोखिम वाले बच्चों की समय पर पहचान कर उनका समुचित उपचार सुनिश्चित करना है। योजना के तहत बच्चों की नियमित स्वास्थ्य जांच, आवश्यक दवाइयों का वितरण, पोषण संबंधी परामर्श तथा जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ उपचार की व्यवस्था की जाती है, ताकि उन्हें कुपोषण के दुष्चक्र से बाहर निकाला जा सके।
जिला प्रशासन की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, जून माह के दौरान सारंगढ़, कोसीर, बरमकेला और लेन्धरा परियोजना क्षेत्रों के विभिन्न सेक्टरों में कुल 19 विशेष शिविर आयोजित किए गए। इन शिविरों में 573 कुपोषित बच्चों की विस्तृत स्वास्थ्य जांच की गई। जांच के दौरान 422 बच्चों को मौके पर ही आवश्यक दवाइयां उपलब्ध कराई गईं, जबकि गंभीर रूप से कुपोषित पाए गए 45 बच्चों को तत्काल उपचार और विशेष देखभाल के लिए पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में भर्ती कराने के लिए रेफर किया गया।
अभियान की विशेषता यह है कि इसे केवल स्वास्थ्य विभाग तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि प्रशासनिक अधिकारियों को भी इसमें सक्रिय जिम्मेदारी दी गई है। अधिकारियों को चिन्हित आंगनबाड़ी केंद्रों से जोड़ा गया है, जहां वे बच्चों के वजन और लंबाई (ऊंचाई) का नियमित सत्यापन कर रहे हैं। साथ ही कुपोषित बच्चों को गोद लेकर उनकी स्वास्थ्य प्रगति की लगातार निगरानी और फॉलोअप भी किया जा रहा है, ताकि उपचार और पोषण संबंधी प्रयासों का प्रभावी परिणाम मिल सके।
जिला प्रशासन ने उन ग्राम पंचायतों की भी पहचान की है, जहां कुपोषण की समस्या अपेक्षाकृत अधिक है। इन क्षेत्रों में विशेष रणनीति के तहत अतिरिक्त स्वास्थ्य शिविर, निगरानी और जागरूकता गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। लक्ष्य यह है कि सर्वाधिक प्रभावित क्षेत्रों में कुपोषण की दर को तेजी से कम किया जा सके।
अभियान को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए स्वयंसेवी संस्थाओं का भी सहयोग लिया जा रहा है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) और रेडक्रॉस जैसी संस्थाएं स्वास्थ्य परीक्षण, चिकित्सकीय परामर्श और जागरूकता कार्यक्रमों में जिला प्रशासन का सहयोग कर रही हैं। इनके माध्यम से बच्चों और उनके अभिभावकों को संतुलित आहार, स्वच्छता और नियमित स्वास्थ्य जांच के महत्व के बारे में भी जानकारी दी जा रही है।
मुख्यमंत्री बाल संदर्भ योजना के तहत बाल रोग विशेषज्ञों द्वारा बच्चों की चिकित्सकीय जांच के साथ-साथ आवश्यक परामर्श भी दिया जा रहा है। जरूरत के अनुसार दवाइयां उपलब्ध कराई जा रही हैं और गंभीर मामलों में तत्काल उच्च स्तरीय उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है। योजना का मुख्य उद्देश्य केवल कुपोषण का उपचार करना नहीं, बल्कि बच्चों के समग्र स्वास्थ्य और पोषण स्तर में सुधार लाना है।
जिला प्रशासन का मानना है कि विभिन्न विभागों के समन्वित प्रयास, नियमित निगरानी, समय पर उपचार और समुदाय की भागीदारी से सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में कुपोषण की समस्या पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकेगा। सरकार की यह पहल बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य, पोषण और सुरक्षित भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।