Anti Paper Leak Bill 2026: लोकसभा में एंटी-पेपर लीक बिल पर शुरू हुई चर्चा, जितेंद्र सिंह बोले- ‘यह कानून बनेगा मील का पत्थर’

नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र के दौरान लंबे गतिरोध के बाद मंगलवार को लोकसभा में एंटी-पेपर लीक (लोक परीक्षा अनुचित साधन निवारण संशोधन) विधेयक पर चर्चा शुरू हुई। विपक्ष के हंगामे के बीच सरकार ने परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और पेपर लीक पर सख्त कार्रवाई के उद्देश्य से विधेयक पेश किया। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने विधेयक पेश करते हुए कहा कि यह कानून देश की परीक्षा व्यवस्था को मजबूत करने वाला “मील का पत्थर” साबित होगा।
‘जिसे इस बिल से आपत्ति होगी, जनता को उससे आपत्ति होगी’
लोकसभा में चर्चा के दौरान डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि पेपर लीक की घटनाएं किसी एक राज्य या किसी एक राजनीतिक दल के शासन तक सीमित नहीं रही हैं। उन्होंने कहा कि विभिन्न राज्यों में अलग-अलग सरकारों के कार्यकाल में ऐसी घटनाएं सामने आई हैं। इसलिए परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित बनाने के लिए एक सख्त और प्रभावी कानून की आवश्यकता महसूस की गई।
उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि जो लोग इस विधेयक का विरोध कर रहे हैं, उन्हें देश के छात्रों और अभिभावकों की भावनाओं को भी समझना चाहिए।
पुराने पेपर लीक मामलों का किया उल्लेख
केंद्रीय मंत्री ने अपने संबोधन में देश में पूर्व में हुई कई प्रमुख परीक्षा अनियमितताओं और पेपर लीक की घटनाओं का जिक्र किया। उन्होंने 2009 की रेलवे भर्ती बोर्ड परीक्षा, पश्चिम बंगाल संयुक्त प्रवेश परीक्षा, 2010 की उत्तर प्रदेश बीएड प्रवेश परीक्षा, 2011 की ऑल इंडिया इंजीनियरिंग एंट्रेंस परीक्षा, 2012 के एम्स दिल्ली पेपर लीक, तमिलनाडु लोक सेवा आयोग परीक्षा तथा 2023 की महाराष्ट्र सेकेंडरी सर्टिफिकेट परीक्षा जैसी घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इन अनुभवों ने अलग कानून की आवश्यकता को और स्पष्ट किया।
NTA के गठन का भी किया जिक्र
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) का गठन वर्ष 2017 में केंद्र सरकार ने किया था। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा एजेंसी की अवधारणा पहली बार 1992 में सामने आई थी और 2010 में विशेषज्ञ समिति ने भी इसकी सिफारिश की थी, लेकिन उस समय इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2024 में पहली बार लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) कानून बनाया गया, क्योंकि इससे पहले परीक्षा में नकल और पेपर लीक जैसे अपराधों के लिए कोई अलग केंद्रीय कानून मौजूद नहीं था। अब बदलती परिस्थितियों और हालिया घटनाओं को देखते हुए सरकार इस कानून को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए संशोधन ला रही है।