
रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजनीति में शुक्रवार को एक अहम सियासी घटनाक्रम सामने आया है। सतनामी समाज के प्रमुख धर्मगुरु गुरु बालदास साहेब के बड़े पुत्र ढाल दास ने कांग्रेस पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली है। खास बात यह है कि ढाल दास, भाजपा सरकार में मंत्री और गुरु बालदास साहेब के पुत्र खुशवंत साहब के बड़े भाई हैं। उनके कांग्रेस में शामिल होने के बाद प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।
ढाल दास ने रायपुर स्थित पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निवास पर आयोजित कार्यक्रम में कांग्रेस का दामन थामा। इस दौरान भूपेश बघेल ने उन्हें कांग्रेस का गमछा पहनाकर पार्टी में स्वागत किया।

कांग्रेस में शामिल होने के क्या हैं सियासी मायने?
ढाल दास के कांग्रेस प्रवेश को छत्तीसगढ़ की राजनीति में महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। गुरु बालदास परिवार की सतनामी समाज में सामाजिक और धार्मिक पकड़ को देखते हुए उनके इस राजनीतिक कदम के अलग-अलग मायने निकाले जा रहे हैं।
गुरु बालदास साहेब का सतनामी समाज में महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है। वहीं उनके पुत्र खुशवंत साहब वर्तमान में भाजपा सरकार में मंत्री हैं। ऐसे में परिवार के बड़े बेटे का कांग्रेस में शामिल होना राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है।
गुरु बालदास के चार बेटे
गुरु बालदास साहेब के चार बेटे ढाल दास, सोमेश दास, खुशवंत दास और सौरभ दास हैं। ढाल दास चारों भाइयों में सबसे बड़े हैं। परिवार की सतनामी समाज से जुड़ी धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों में महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
गुरु बालदास परिवार का संबंध बाबा गुरु घासीदास की वंश परंपरा और भंडारपुरी धाम से जुड़ा बताया जाता है। सतनामी समाज से जुड़े धार्मिक और सामाजिक आयोजनों में परिवार की सक्रिय भागीदारी रहती है।

समाज और धार्मिक आयोजनों में सक्रिय रहा है गुरु परिवार
ढाल दास गुरु बालदास साहेब के ज्येष्ठ पुत्र होने के साथ परिवार के वरिष्ठ सदस्य भी हैं। सतनामी समाज से जुड़े विभिन्न धार्मिक एवं सामाजिक आयोजनों में वे परिवार के अन्य सदस्यों के साथ सक्रिय रूप से शामिल होते रहे हैं।
गिरौधपुरी धाम और भंडारपुरी धाम से जुड़े आयोजनों में भी गुरु परिवार की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। ऐसे में ढाल दास के कांग्रेस में शामिल होने को राजनीतिक दल बदलने के साथ-साथ सामाजिक दृष्टि से भी अहम घटनाक्रम माना जा रहा है।
छत्तीसगढ़ की राजनीति में बढ़ी चर्चा
ढाल दास के कांग्रेस में शामिल होने के बाद अब इसके राजनीतिक प्रभाव को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। खासकर सतनामी समाज के बीच इस घटनाक्रम का क्या असर होगा और आने वाले समय में ढाल दास की कांग्रेस में क्या भूमिका रहेगी, इसे लेकर राजनीतिक नजरें टिकी हुई हैं।

