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नासिक सिंहस्थ कुंभ 2028 का शंखनाद, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने फहराया धर्मध्वज

रायपुर। महाराष्ट्र के नासिक में सिंहस्थ कुंभ मेले की तैयारियों का औपचारिक आगाज हो गया है। शनिवार को गोदावरी नदी के पवित्र तट स्थित रामतीर्थ में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने वैदिक मंत्रोच्चार और शंखनाद के बीच धर्मध्वज फहराया। इस अवसर पर संतों, राजनेताओं और हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी रही। धर्मध्वज फहराए जाने के साथ ही नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभ मेले का शुभारंभ हो गया।

समारोह के दौरान राष्ट्रपति मुर्मू ने सबसे पहले यज्ञकुंड में आहुतियां अर्पित कीं। इसके बाद उन्होंने विधि-विधान से मां गोदावरी की पूजा-अर्चना की और धर्मध्वज को नमन किया। पुरोहितों के वैदिक मंत्रोच्चार के बीच जैसे ही राष्ट्रपति ने ध्वज फहराया, पूरा रामतीर्थ परिसर शंखध्वनि से गूंज उठा। धार्मिक अनुष्ठान पुरोहित संघ के अध्यक्ष चंद्रशेखर पंचक्षरी और पुरोहित सतीश शुक्ला के नेतृत्व में संपन्न हुए।

पुरोहित सतीश शुक्ला ने कहा कि धर्मध्वज केवल धार्मिक पहचान का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह हजारों वर्षों पुरानी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपराओं को वर्तमान पीढ़ी से जोड़ता है।

त्र्यंबकेश्वर में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने फहराया ध्वज

नासिक से लगभग 30 किलोमीटर दूर त्र्यंबकेश्वर के कुशावर्त तीर्थ में भी सिंहस्थ कुंभ मेले के लिए विशेष धार्मिक आयोजन किया गया। यहां मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने धर्मध्वज फहराया। इस अवसर पर श्रृंगेरी पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य विधुशेखर भारती सहित अनेक संत और धार्मिक गणमान्य उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में पुरोहितों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ मां गोदावरी की स्तुति की। इसके बाद संकल्प अनुष्ठान संपन्न हुआ। इस दौरान विश्व के सभी प्राणियों की सुख-शांति, समृद्धि और कल्याण की कामना की गई।

सिंहस्थ कुंभ में धर्मध्वज का विशेष महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सिंहस्थ कुंभ का संबंध बृहस्पति ग्रह के सिंह राशि में प्रवेश से है। इस खगोलीय स्थिति को कुंभ आयोजन की ज्योतिषीय परंपरा में विशेष महत्व दिया जाता है। इसी कारण धर्मध्वज फहराने का अनुष्ठान भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

श्री गंगा-गोदावरी धर्मध्वज पर कई पवित्र प्रतीक अंकित हैं। इनमें अमृत कुंभ अमरता, मोक्ष और दिव्य शक्ति का प्रतीक है, जबकि ओंकार संपूर्ण ब्रह्मांड और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करता है। ध्वज पर अंकित ‘श्री’ अक्षर शुभता और विजय का प्रतीक माना गया है।

इसके अलावा रेशम के 12 गुच्छे सामाजिक एकता और सामूहिक शक्ति को दर्शाते हैं। ध्वज पर लगी एक बड़ी और तीन छोटी घंटियां ब्रह्मांड की मूल ध्वनि का प्रतीक हैं। ध्वज के दूसरी ओर देवी गोदावरी के वाहन मगरमच्छ के साथ सूर्य और चंद्रमा के शुभ चिह्न भी अंकित हैं।

जुलाई 2028 तक चलेगा सिंहस्थ कुंभ मेला

नासिक और त्र्यंबकेश्वर में आयोजित होने वाला सिंहस्थ कुंभ मेला जुलाई 2028 तक चलेगा। जारी कार्यक्रम के अनुसार, त्र्यंबकेश्वर में 24 जुलाई 2028 को और नासिक में 29 जुलाई 2028 को समापन समारोह आयोजित किया जाएगा। इस तरह सिंहस्थ कुंभ का आयोजन लगभग 21 महीने तक चलेगा।

इस भव्य धार्मिक आयोजन में देश-विदेश से लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। इसे देखते हुए महाराष्ट्र सरकार और प्रशासन ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए बुनियादी ढांचे, स्वच्छता, यातायात प्रबंधन, सुरक्षा और नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाने पर काम किया जा रहा है।

नासिक के संरक्षक मंत्री गिरीश महाजन ने कहा कि प्राचीन धार्मिक परंपराओं की पवित्रता बनाए रखते हुए आधुनिक व्यवस्थाओं को विकसित किया जा रहा है, ताकि गोदावरी में पवित्र स्नान और संतों के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की यात्रा सुरक्षित, सुगम और यादगार बन सके।

गोदावरी के पवित्र तट पर फहराया गया धर्मध्वज अब देश-विदेश के श्रद्धालुओं को सिंहस्थ कुंभ के इस भव्य धार्मिक आयोजन में शामिल होने का आमंत्रण दे रहा है।

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