एम्स बिलासपुर के पहले दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति मुर्मू का संदेश, 92 छात्रों को मिली डिग्री

रायपुर। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार को एम्स बिलासपुर के पहले दीक्षांत समारोह में 92 छात्रों को डिग्री प्रदान की। इस अवसर पर उन्होंने नवस्नातक चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों से लोगों की जरूरतों को अपने कार्य के केंद्र में रखने तथा दूरदराज और दुर्गम क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच मजबूत करने का आह्वान किया।
हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कविंदर गुप्ता और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा की मौजूदगी में समारोह को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि एम्स बिलासपुर के पहले स्नातक बैच पर संस्थान की पहचान और विरासत को आकार देने की विशेष जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि चिकित्सा का क्षेत्र केवल विज्ञान और तकनीक तक सीमित नहीं है, बल्कि यह करुणा और विश्वास का क्षेत्र भी है।

राष्ट्रपति ने डिग्री और स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों के साथ उनके माता-पिता, अभिभावकों और शिक्षकों को भी बधाई दी। उन्होंने कहा कि चिकित्सा पेशे के साथ मानवता के प्रति जिम्मेदारी भी जुड़ी होती है। उन्होंने स्नातकों से अपने पेशेवर जीवन में संवेदनशीलता, करुणा और सेवा की भावना को बनाए रखने की अपील की।
दूरदराज क्षेत्रों में टेलीमेडिसिन को बढ़ावा देने पर जोर
एम्स बिलासपुर की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए राष्ट्रपति ने संस्थान से टेलीमेडिसिन, विशेषज्ञ परामर्श, चिकित्सा कर्मियों के प्रशिक्षण और आधुनिक तकनीक के माध्यम से तृतीयक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने का आग्रह किया। उन्होंने विशेष रूप से उन लोगों तक विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा पहुंचाने पर जोर दिया, जिनकी ऐसे उपचार तक पहुंच सीमित है।
राष्ट्रपति मुर्मू ने आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह योजना स्वास्थ्य देखभाल की लागत कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। पात्र लाभार्थियों को प्रति परिवार प्रति वर्ष 5 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा कवर मिलता है। उन्होंने स्वास्थ्य सुरक्षा योजनाओं की जानकारी दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों तक पहुंचाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
उन्होंने एम्स जैसे प्रमुख संस्थानों से बुनियादी और किफायती स्वास्थ्य समाधान विकसित करने तथा अनुसंधान को ऐसे नवाचारों में बदलने का आह्वान किया, जिनसे आम लोगों के जीवन में सुधार हो सके। राष्ट्रपति ने स्नातकों को चिकित्सा क्षेत्र में लगातार हो रहे बदलावों के साथ तालमेल बनाए रखने और जीवनभर सीखते रहने की सलाह दी।

देश में मेडिकल शिक्षा का तेजी से विस्तार: नड्डा
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि देश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या 384 से बढ़कर 800 से अधिक हो गई है। वहीं, स्नातक चिकित्सा सीटों की संख्या 51,348 से बढ़कर 1.42 लाख हो गई है। उन्होंने बताया कि सरकार का लक्ष्य वर्ष 2029 तक स्नातक और स्नातकोत्तर चिकित्सा सीटों में 75 हजार सीटें जोड़ना है।
नड्डा ने कहा कि 10 हजार अतिरिक्त एमबीबीएस और स्नातकोत्तर सीटें सृजित करने के लिए 15 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों में 16 नए एम्स स्थापित किए गए हैं। इससे गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा और विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच का विस्तार हुआ है।
776 बेड और 26 विशेषज्ञताओं के साथ आगे बढ़ रहा एम्स
नड्डा ने बताया कि एम्स बिलासपुर की बिस्तर क्षमता शुरुआती 750 के लक्ष्य से बढ़कर 776 हो गई है। संस्थान में 26 विशेषज्ञताएं और 15 सुपर स्पेशियलिटी सेवाएं पूरी तरह कार्यरत हैं। यहां जटिल सर्जरी, कार्डियक कैथेटराइजेशन, न्यूरोसर्जरी, कैंसर उपचार और रेडियोथेरेपी जैसी सेवाएं उपलब्ध हैं।
उन्होंने कहा कि पिछले चार वर्षों में एम्स बिलासपुर में बाह्य रोगी परामर्श की संख्या 12 लाख से अधिक रही, जबकि एक लाख से ज्यादा मरीजों को अस्पताल में भर्ती कर उपचार दिया गया। नड्डा ने शिक्षकों और कर्मचारियों की सराहना करते हुए विश्वास जताया कि एम्स बिलासपुर जल्द ही देश के अन्य प्रमुख एम्स संस्थानों के समकक्ष अपनी पहचान बनाएगा।
92 छात्रों को मिली डिग्री
पहले दीक्षांत समारोह में कुल 92 छात्रों को डिग्री प्रदान की गई। इनमें 43 एमबीबीएस, 26 बीएससी ऑनर्स नर्सिंग, 9 बीएससी एलाइड हेल्थकेयर और 14 एमडी/एमएस के विद्यार्थी शामिल रहे।
राष्ट्रपति मुर्मू ने विभिन्न विषयों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक भी प्रदान किए। इनमें एमबीबीएस से सागरिका और रक्षित वशिष्ठ, बीएससी एलाइड हेल्थकेयर साइंस से भावना ठकराल, बीएससी ऑनर्स नर्सिंग से भव्य मल्होत्रा और कम्युनिटी एंड फैमिली मेडिसिन में एमडी से प्रतीक गोयल शामिल हैं।
पांच वर्षों में तेजी से बढ़ा संस्थान
एम्स बिलासपुर ने जनवरी 2021 में एमबीबीएस के पहले बैच को प्रवेश दिया था। इसके बाद 2022 में एलाइड हेल्थकेयर साइंसेज और नर्सिंग साइंसेज के पहले बैच शुरू हुए। संस्थान का औपचारिक उद्घाटन अक्टूबर 2022 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में हुआ था।
वर्ष 2024-25 के दौरान एम्स बिलासपुर में तीन लाख से अधिक बाह्य रोगी परामर्श दर्ज किए गए। इस दौरान 17 हजार से अधिक लोगों को आपातकालीन चिकित्सा सेवाएं दी गईं। संस्थान में 3,500 से अधिक बड़ी सर्जरी, 900 से अधिक छोटी सर्जरी और 1,000 से ज्यादा कार्डियक कैथेटराइजेशन प्रक्रियाएं हुईं। इसके अलावा 3,200 से अधिक डायलिसिस सत्र आयोजित किए गए और निदान प्रयोगशालाओं में 10 लाख से अधिक परीक्षण किए गए।
वर्तमान में संस्थान में करीब 620 विद्यार्थी स्नातक, स्नातकोत्तर और सुपर स्पेशियलिटी पाठ्यक्रमों में अध्ययन कर रहे हैं।
समारोह में राज्यसभा सांसद हर्ष महाजन, एम्स बिलासपुर के कार्यकारी निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल (डॉ.) दलजीत सिंह (सेवानिवृत्त), संस्थान के अध्यक्ष प्रोफेसर (डॉ.) नरेंद्र कुमार अरोरा सहित अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने भी स्नातकों और संस्थान को शुभकामनाएं दीं।