
नई दिल्ली (एजेंसी)। केंद्र की मोदी सरकार एक बार फिर परिसीमन विधेयक (Delimitation Bill) को लेकर सक्रिय नजर आ रही है। हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों, विशेषकर विपक्षी दलों में टूट और बदलते समीकरणों के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) संसद में इस महत्वपूर्ण विधेयक को पारित कराने के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत जुटाने के करीब पहुंच चुका है।
राजनीतिक विश्लेषणों के अनुसार पश्चिम बंगाल में चुनावी बदलाव, तृणमूल कांग्रेस (TMC) और शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) जैसे दलों में अंदरूनी अस्थिरता ने केंद्र सरकार की संभावनाओं को मजबूत किया है। हालांकि अभी भी सरकार के सामने आवश्यक संख्या जुटाने की चुनौती पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।
अप्रैल में बहुमत से पीछे रह गई थी सरकार
अप्रैल 2026 में सरकार ने संसद में महिलाओं के लिए सीट आरक्षण से जुड़े परिसीमन संबंधी संविधान संशोधन (131वां) विधेयक पेश किया था। यह विधेयक लोकसभा में आवश्यक समर्थन नहीं जुटा सका और मतदान के दौरान गिर गया था।
लोकसभा में कुल 543 सीटें हैं, लेकिन तीन सीटें खाली होने के कारण प्रभावी संख्या 540 मानी गई। सामान्य स्थिति में संविधान संशोधन विधेयक पास कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत यानी 360 सांसदों का समर्थन आवश्यक होता है। हालांकि उस दिन 12 सांसद अनुपस्थित रहे और कुल 528 सदस्यों ने मतदान किया। ऐसे में दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा घटकर 352 वोट रह गया।
मतदान में सरकार को 298 वोट समर्थन में मिले, जबकि 230 सांसदों ने विरोध में मतदान किया। इस तरह सरकार आवश्यक संख्या से 54 वोट पीछे रह गई थी।
टीएमसी और शिवसेना (यूबीटी) से बढ़ी ताकत
हाल के राजनीतिक बदलावों में टीएमसी और शिवसेना (यूबीटी) के कुछ सांसदों के अलग होने से सरकार की स्थिति मजबूत हुई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार टीएमसी के 20 सांसद और शिवसेना (यूबीटी) के 6 सांसद संभावित रूप से एनडीए के समर्थन में आ सकते हैं।
यदि इन 26 सांसदों का समर्थन सरकार को मिलता है, तो पहले की तुलना में बहुमत का अंतर काफी कम हो जाएगा। अप्रैल की स्थिति को आधार मानें तो सरकार को अब भी करीब 28 सांसदों की जरूरत होगी।
डीएमके बन सकती है बड़ा फैक्टर
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि तमिलनाडु की प्रमुख पार्टी डीएमके (DMK) की भूमिका आगे निर्णायक हो सकती है। हाल के दिनों में डीएमके और कांग्रेस के बीच कुछ मुद्दों पर मतभेद की खबरें सामने आई हैं।
अगर डीएमके सरकार के पक्ष में आती है, तो उसके 22 लोकसभा सांसदों के समर्थन से सरकार बहुमत के बेहद करीब पहुंच सकती है। ऐसे में लोकसभा में आवश्यक दो-तिहाई बहुमत से सरकार की दूरी घटकर सिर्फ 6 सांसदों तक रह जाएगी।
छोटे दलों पर भी एनडीए की नजर
सूत्रों के अनुसार एनडीए नेतृत्व विपक्षी गठबंधन के कुछ छोटे दलों के संपर्क में भी है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में कुछ क्षेत्रीय दल अपनी राजनीतिक रणनीति बदल सकते हैं।
यदि छोटे दलों से अतिरिक्त समर्थन मिलता है तो सरकार के लिए लोकसभा में आवश्यक संख्या जुटाना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है।
राज्यसभा में भी समीकरण बदल रहे
परिसीमन विधेयक जैसे संविधान संशोधन बिल को संसद के दोनों सदनों से दो-तिहाई बहुमत से पास कराना जरूरी होता है। ऐसे में राज्यसभा की स्थिति भी महत्वपूर्ण है।
राज्यसभा में कुल 245 सदस्य होते हैं और यहां दो-तिहाई बहुमत के लिए 164 सांसदों का समर्थन आवश्यक माना जाता है। हाल ही में टीएमसी के तीन सांसदों के इस्तीफे के बाद प्रभावी संख्या घटने से यह आंकड़ा 162 रह गया है।
वर्तमान में एनडीए के पास करीब 150 सांसदों का समर्थन माना जा रहा है। यदि डीएमके के 8 राज्यसभा सांसद भी समर्थन देते हैं, तो यह संख्या बढ़कर 158 तक पहुंच सकती है।
इस स्थिति में सरकार राज्यसभा में आवश्यक बहुमत से सिर्फ 4 सांसद पीछे रह जाएगी।
मानसून सत्र पर टिकी निगाहें
आगामी संसद के मानसून सत्र को लेकर राजनीतिक हलचल तेज है। यदि विपक्षी दलों में टूट और नए राजनीतिक समीकरण इसी तरह जारी रहते हैं, तो केंद्र सरकार के लिए परिसीमन विधेयक को आगे बढ़ाने की संभावनाएं मजबूत हो सकती हैं।
फिलहाल तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, लेकिन इतना तय है कि संसद के आगामी सत्र में यह मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति का बड़ा केंद्र बनने जा रहा है।