सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश: बुजुर्ग और गंभीर बीमार कैदियों की समय से पहले रिहाई के लिए 3 महीने में बनेगी नीति


नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने देश के सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को बुजुर्ग, गंभीर बीमार, अशक्त और अस्वस्थ कैदियों की समय से पहले रिहाई (Premature Release) के लिए तीन महीने के भीतर स्पष्ट नीति तैयार करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि इस प्रक्रिया को पारदर्शी, समयबद्ध और प्रभावी बनाने के लिए तकनीक आधारित डिजिटल व्यवस्था लागू की जाए।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्देश में कहा कि पात्र कैदियों की रिहाई संबंधी आवेदन प्रक्रिया अब e-Prisons पोर्टल के माध्यम से पूरी की जाएगी। इससे आवेदन की ऑनलाइन निगरानी, समय पर निस्तारण और पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित होगी।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि समय से पहले रिहाई के मामलों में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए। राज्य सरकारों को ऐसी व्यवस्था विकसित करनी होगी, जिससे पात्र कैदियों के आवेदन तय समय-सीमा में संबंधित अधिकारियों तक पहुंचें और उन पर शीघ्र निर्णय लिया जा सके।
सुप्रीम कोर्ट का मानना है कि बढ़ती उम्र, गंभीर बीमारी, शारीरिक अक्षमता और खराब स्वास्थ्य से जूझ रहे कैदियों के मामलों में मानवीय दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है। नई नीति से ऐसे कैदियों को समय पर राहत मिलने की उम्मीद है, वहीं डिजिटल प्रणाली के जरिए पूरी प्रक्रिया अधिक जवाबदेह और पारदर्शी बनेगी।
मुख्य बातें
- सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को 3 महीने में नीति बनाने का निर्देश।
- बुजुर्ग, गंभीर बीमार, अशक्त और अस्वस्थ कैदियों को मिलेगा लाभ।
- समय से पहले रिहाई की प्रक्रिया होगी पारदर्शी और समयबद्ध।
- e-Prisons पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन और निगरानी की व्यवस्था।
- अनावश्यक देरी रोकने के लिए तकनीक आधारित डिजिटल सिस्टम लागू करने पर जोर।
