SIMS बिलासपुर में GENOVIA-ISAR कार्यशाला: IVF और Infertility की आधुनिक तकनीकों पर विशेषज्ञों ने दी अहम जानकारी

रायपुर, 31 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (SIMS) एवं चिकित्सालय, बिलासपुर के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग द्वारा GENOVIA–ISAR के अंतर्गत इन्फर्टिलिटी (Infertility), आईवीएफ (IVF) और असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (ART) विषय पर एक दिवसीय वैज्ञानिक कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य चिकित्सकों, स्नातकोत्तर विद्यार्थियों और मेडिकल छात्रों को प्रजनन चिकित्सा के क्षेत्र में हो रहे नवीनतम वैज्ञानिक शोध और आधुनिक उपचार तकनीकों से अवगत कराना था।
विशेषज्ञों ने साझा किए आधुनिक उपचार के अनुभव
कार्यक्रम में सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह, नोडल अधिकारी डॉ. भूपेंद्र कश्यप तथा विभागाध्यक्ष डॉ. संगीता रमण जोगी मौजूद रहे। कार्यशाला का सफल संचालन मुख्य समन्वयक डॉ. वेरोनिका के नेतृत्व में किया गया।
कार्यशाला में सिम्स की डॉ. दीपिका सिंह, डॉ. रचना जैन, डॉ. सोमा वेंकट, डॉ. सौम्या दर्शन, डॉ. प्रतिभा सिंह और डॉ. प्राची तिवारी ने इन्फर्टिलिटी, IVF और ART से जुड़े विभिन्न वैज्ञानिक विषयों पर विस्तृत व्याख्यान दिए।
रायपुर और बिलासपुर के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने दिया मार्गदर्शन
बिलासपुर से डॉ. रश्मि शर्मा, डॉ. संगीता शर्मा, डॉ. गीतिका शर्मा और डॉ. इंदुबाला मिंज ने आधुनिक प्रजनन चिकित्सा से जुड़े अपने अनुभव साझा किए।
वहीं रायपुर मेडिकल कॉलेज की विभागाध्यक्ष डॉ. ज्योति जायसवाल, डॉ. वेरोनिका और डॉ. मोनिका ने जटिल इन्फर्टिलिटी मामलों के प्रबंधन, आधुनिक IVF तकनीकों और नवीनतम ART उपचार पद्धतियों पर विशेषज्ञ व्याख्यान प्रस्तुत किए।
पीजी रेजिडेंट्स और मेडिकल छात्रों ने लिया प्रशिक्षण
कार्यशाला में SIMS के पीजी रेजिडेंट्स, एमबीबीएस अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों के साथ अपोलो हॉस्पिटल और रेलवे हॉस्पिटल के डीएनबी विद्यार्थियों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रतिभागियों ने विशेषज्ञों से सीधे संवाद कर आधुनिक प्रजनन चिकित्सा से जुड़ी नई जानकारियां प्राप्त कीं।
इन्फर्टिलिटी के इलाज में आधुनिक तकनीक की बढ़ी भूमिका
प्रसूति एवं स्त्री रोग विभागाध्यक्ष डॉ. संगीता रमण जोगी ने कहा कि आज इन्फर्टिलिटी की समस्या तेजी से बढ़ रही है, लेकिन आधुनिक चिकित्सा और Assisted Reproductive Technology की मदद से अधिकांश दंपत्तियों का सफल उपचार संभव है। उन्होंने कहा कि इस तरह की वैज्ञानिक कार्यशालाएं चिकित्सकों के ज्ञान और कौशल को अद्यतन रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ाने पर जोर
चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने कहा कि सिम्स में नियमित रूप से इस प्रकार की वैज्ञानिक कार्यशालाओं का आयोजन किया जा रहा है, ताकि डॉक्टरों को चिकित्सा विज्ञान की नई तकनीकों का प्रशिक्षण मिल सके और मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें।
सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने कहा कि चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञों के साथ ऐसे शैक्षणिक कार्यक्रम लगातार आयोजित किए जाएंगे, जिससे प्रदेश के मरीजों को आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण उपचार का लाभ मिल सके।
कार्यक्रम का समापन
कार्यक्रम के अंत में सभी विशेषज्ञ वक्ताओं, प्रतिभागियों और आयोजन समिति के सदस्यों का आभार व्यक्त किया गया। साथ ही भविष्य में भी इसी प्रकार की वैज्ञानिक एवं शैक्षणिक गतिविधियों को निरंतर आयोजित करने का संकल्प लिया गया।


