यूक्रेन में भारतीय दवा कंपनी कुसुम ग्रुप के प्लांट पर रूसी ड्रोन हमला, एक की मौत

रायपुर। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच यूक्रेन के सूमी शहर में भारतीय जड़ों वाली दवा कंपनी कुसुम ग्रुप के फार्मास्युटिकल प्लांट पर रूसी ड्रोन से भीषण हमला हुआ है। हमले में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि कई अन्य लोगों के घायल होने की सूचना है। अधिकारियों के मुताबिक, हमले में प्लांट की इमारत का मुख्य ढांचा लगभग पूरी तरह तबाह हो गया है।
हमले के बाद सामने आए वीडियो और तस्वीरों में प्लांट से धुएं का बड़ा गुबार उठता दिखाई दिया। राहत और बचाव कार्य जारी है। अधिकारियों का कहना है कि हताहतों और घायलों की संख्या में आगे बदलाव हो सकता है।
400 करोड़ रुपये से अधिक नुकसान का अनुमान
कुसुम ग्रुप का यह प्लांट रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान भी लगातार काम करता रहा था। हालांकि, ताजा ड्रोन हमले में संयंत्र को भारी नुकसान पहुंचा है। प्रारंभिक अनुमानों के अनुसार कंपनी को इस हमले से कम से कम 400 करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान होने की आशंका है।
प्लांट को हुए नुकसान का असर यूक्रेन में दवाओं की आपूर्ति पर भी पड़ सकता है। कंपनी के उत्पादन और वितरण नेटवर्क के प्रभावित होने से स्थानीय बाजार में कुछ दवाओं की उपलब्धता पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
1994 में हुई थी कुसुम ग्रुप की शुरुआत
कुसुम ग्रुप की शुरुआत वर्ष 1994 में भारत से यूक्रेन में दवाइयों का निर्यात करने वाली एक डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी के रूप में हुई थी। वर्तमान में कंपनी का संचालन भारतीय नागरिक राजीव गुप्ता कर रहे हैं।
वर्ष 2002 में कंपनी ने दूसरी कंपनियों के उत्पादों की बिक्री से आगे बढ़ते हुए अपने खुद के ब्रांड बाजार में उतारने शुरू किए। इसके बाद कंपनी ने दवा निर्माण के क्षेत्र में कदम रखा।
कंपनी ने वर्ष 2007 में भारत और 2009 में यूक्रेन के सूमी में अपने विनिर्माण संयंत्र स्थापित किए। इसके बाद भारत में दो और प्लांट शुरू किए गए।
9 से ज्यादा देशों में दवाओं की बिक्री
कुसुम ग्रुप मुख्य रूप से 50 से अधिक जेनेरिक दवाओं का निर्माण करता है। कंपनी इन दवाओं की बिक्री नौ से अधिक देशों में करती है। इनमें यूक्रेन के अलावा उज्बेकिस्तान, कजाकिस्तान और फिलीपींस प्रमुख बाजार हैं।
कुसुम ग्रुप खुद को भारतीय जड़ों वाली यूक्रेनी कंपनी के तौर पर पेश करता है। ऐसे में सूमी स्थित उसके प्रमुख फार्मास्युटिकल प्लांट पर हुआ हमला न केवल कंपनी के लिए बड़ा आर्थिक झटका है, बल्कि यूक्रेन में दवा उत्पादन और आपूर्ति व्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।



