छत्तीसगढ़

राज्य के सिंचाई जलाशयों में 67% से अधिक जल भराव, पिछले दो वर्षों से बेहतर स्थिति

रायपुर, 10 अप्रैल 2026। छत्तीसगढ़ के 12 वृहद एवं 34 मध्यम सिंचाई परियोजनाओं सहित कुल 46 प्रमुख जलाशयों में इस वर्ष जल भराव की स्थिति उल्लेखनीय रूप से बेहतर दर्ज की गई है। वर्तमान में इन जलाशयों में औसतन 67.43 प्रतिशत जल भराव है, जो वर्ष 2025 में इसी अवधि के 45.23 प्रतिशत तथा वर्ष 2024 के 42 प्रतिशत की तुलना में काफी अधिक है।

वृहद परियोजनाओं की स्थिति

राज्य की 12 वृहद सिंचाई परियोजनाओं में वर्तमान में 68.19 प्रतिशत जल भराव है। पिछले वर्ष 2025 में यह 45.84 प्रतिशत और वर्ष 2024 में 38.62 प्रतिशत था।

प्रमुख जलाशयों में जल उपलब्धता इस प्रकार है—

  • मनियारी – 90.41%
  • मुरूमसिल्ली – 86.85%
  • खारंग – 84.99%
  • दुधावा – 84.54%
  • रविशंकर सागर (गंगरेल) – 76.72%
  • सोंढूर – 70.65%
  • तांदुला – 66.19%
  • मिनीमाता बांगो – 63.86%
  • केलो – 51.83%
  • कोडार – 35.45%

मध्यम परियोजनाओं में भी संतोषजनक भराव

राज्य की 34 मध्यम सिंचाई परियोजनाओं में वर्तमान में औसतन 63.38 प्रतिशत जल भराव है, जो वर्ष 2025 के 44.62 प्रतिशत और वर्ष 2024 के 45.38 प्रतिशत से अधिक है।

प्रमुख मध्यम जलाशयों की स्थिति—

  • खपरी – 92.98%
  • छिरपानी – 92.23%
  • पिपरिया नाला – 89.69%
  • गोंडली – 85.53%
  • सुतियापाट – 79.82%
  • सारोदा – 77.57%
  • कोसारटेडा – 77.46%

चरणबद्ध जल वितरण जारी

किसानों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए विभिन्न परियोजनाओं से नियंत्रित एवं चरणबद्ध रूप से जल छोड़ा जा रहा है। रविशंकर सागर (गंगरेल), दुधावा, सोंढूर, कोडार एवं परालकोट परियोजनाओं से नहरों के माध्यम से सिंचाई और निस्तारी के लिए जल उपलब्ध कराया जा रहा है। कोडार जलाशय से लगभग 6.84 क्यूमेक्स जल छोड़ा जा रहा है।

मध्यम परियोजनाओं जैसे खरखरा, गोंडली, पिपरिया, सारोदा, जुमका और केदार नाला से भी आवश्यकता अनुसार पानी छोड़ा जा रहा है, ताकि रबी फसलों की अंतिम सिंचाई और ग्रीष्मकालीन फसलों के लिए पर्याप्त जल उपलब्ध हो सके।

सरकार का फोकस: वैज्ञानिक जल प्रबंधन

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा है कि राज्य सरकार किसानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए जल संसाधनों का वैज्ञानिक और प्रभावी प्रबंधन सुनिश्चित कर रही है। उन्होंने अधिकारियों को जलाशयों के जल स्तर की सतत निगरानी और संतुलित उपयोग के निर्देश दिए हैं, ताकि सभी सिंचित क्षेत्रों को समय पर पर्याप्त पानी मिल सके।

बेहतर वर्षा और सुनियोजित प्रबंधन के परिणामस्वरूप इस वर्ष जल उपलब्धता की स्थिति मजबूत हुई है, जिससे प्रदेश में कृषि उत्पादन को सकारात्मक बल मिलने की उम्मीद है।

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