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कोरबा में पहाड़ी कोरवा समुदाय के लिए बड़ी पहल, 125 केज कल्चर और 5 बायोफ्लॉक तालाब होंगे स्थापित

कोरबा। विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा समुदाय के आर्थिक सशक्तीकरण और स्थायी आजीविका के साधन उपलब्ध कराने की दिशा में कोरबा जिला प्रशासन ने महत्वपूर्ण पहल की है। जिला खनिज संस्थान न्यास (DMF) मद और प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अभिसरण से पहाड़ी कोरवा समुदाय के लिए आधुनिक मत्स्य पालन गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा।

इस पहल के तहत हसदेव बांगो जलाशय में 125 केज कल्चर स्थापित किए जाएंगे। इसके अलावा आधुनिक तकनीक से 5 बायोफ्लॉक तालाबों का निर्माण भी किया जाएगा। इससे समुदाय के सदस्यों को रोजगार और स्वरोजगार के स्थायी अवसर मिलेंगे।

25 सदस्यों के लिए लगाए जाएंगे 125 केज

हसदेव बांगो जलाशय में केज कल्चर स्थापना के लिए जिला खनिज संस्थान न्यास से 2 करोड़ 25 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। इसके अंतर्गत जिले की एकमात्र विशेष पिछड़ी जनजाति कोरवा समुदाय के लालपुर स्थित पंजीकृत मत्स्य सहकारी समिति के 25 सदस्यों के लिए 125 केज स्थापित किए जाएंगे।

केज कल्चर के माध्यम से प्रत्येक सदस्य को कम से कम 1 लाख रुपये की शुद्ध वार्षिक आय प्राप्त होने की उम्मीद है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और फुटकर मछली विक्रेताओं को भी आजीविका का साधन मिलेगा।

प्रशासन के अनुसार, इस पहल से हसदेव बांगो जलाशय के मत्स्य उत्पादन में लगभग 250 मीट्रिक टन की वृद्धि होने की संभावना है।

आधुनिक तकनीक से बनेंगे 5 बायोफ्लॉक तालाब

मत्स्य पालन को आधुनिक और वैज्ञानिक तरीके से बढ़ावा देने के लिए 0.10 हेक्टेयर क्षेत्र में बायोफ्लॉक तालाबों का निर्माण किया जाएगा। इसके लिए जिला खनिज संस्थान न्यास से 70 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई है।

योजना के तहत जिले में 5 इकाई बायोफ्लॉक तालाब बनाए जाएंगे। इसके माध्यम से हितग्राहियों को कम भूमि और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करते हुए मछली पालन का अवसर मिलेगा। प्रत्येक इकाई से हितग्राही को लगभग 3 से 4 लाख रुपये वार्षिक आय प्राप्त होने की संभावना है।

आर्थिक सशक्तीकरण और रोजगार पर जोर

जिला प्रशासन की इस पहल का उद्देश्य विशेष पिछड़ी जनजाति समुदाय के परिवारों को पारंपरिक आजीविका के साथ-साथ आधुनिक और टिकाऊ रोजगार से जोड़ना है। मत्स्य पालन के क्षेत्र में तकनीक और योजनाओं के अभिसरण से स्थानीय स्तर पर आय के नए स्रोत विकसित होने की उम्मीद है।

कलेक्टर श्री कुणाल दुदावत ने जिले के विशेष पिछड़ी जनजाति समुदायों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने, स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने और मत्स्य उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

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