छत्तीसगढ़

भिलाई नगर चुनाव मामला: हाईकोर्ट ने विधायक देवेंद्र यादव की याचिका खारिज की, चुनाव याचिका पर सुनवाई जारी रहेगी

चुनावी भ्रष्टाचार और जानकारी छिपाने के आरोपों की जांच के लिए ट्रायल जरूरी, दस्तावेजों के आधार पर फैसला संभव नहीं: हाईकोर्ट

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने भिलाई नगर विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव को चुनाव याचिका मामले में राहत देने से इनकार कर दिया है। न्यायालय ने विधायक की ओर से दायर उस आवेदन को खारिज कर दिया, जिसमें चुनाव याचिका के कुछ बिंदुओं को प्रारंभिक मुद्दा (Preliminary Issue) मानते हुए बिना विस्तृत ट्रायल के मामले का निपटारा करने का अनुरोध किया गया था।

हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद अब चुनाव याचिका पर नियमित न्यायिक प्रक्रिया के तहत सुनवाई जारी रहेगी। मामले में प्रस्तुत आरोपों की जांच गवाहों, दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी।

क्या था विधायक का आवेदन?

भिलाई नगर से कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव ने हाईकोर्ट में आवेदन प्रस्तुत कर आग्रह किया था कि चुनाव याचिका में उठाए गए कुछ कानूनी बिंदुओं पर पहले ही निर्णय लिया जाए। उनका तर्क था कि यदि इन प्रारंभिक मुद्दों का निस्तारण कर दिया जाए, तो पूरे मामले की लंबी सुनवाई की आवश्यकता नहीं रहेगी।

हालांकि, हाईकोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया और आवेदन खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि मामले में लगाए गए आरोप गंभीर प्रकृति के हैं। ऐसे आरोपों का निर्णय केवल दस्तावेजों के आधार पर नहीं किया जा सकता, बल्कि इनके लिए साक्ष्यों और गवाहों की विस्तृत जांच आवश्यक है।

अदालत ने क्या कहा?

उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि चुनावी भ्रष्टाचार अथवा नामांकन से संबंधित अनिवार्य जानकारियां छिपाने जैसे आरोप तथ्यात्मक जांच की मांग करते हैं। इसलिए इनका निपटारा प्रारंभिक स्तर पर नहीं किया जा सकता।

अदालत के अनुसार, ऐसे मामलों में दोनों पक्षों को अपने-अपने साक्ष्य प्रस्तुत करने और गवाहों से जिरह का अवसर मिलना आवश्यक है। इसके बाद ही न्यायालय अंतिम निष्कर्ष पर पहुंच सकता है।

चुनाव याचिका में क्या हैं आरोप?

भिलाई नगर विधानसभा चुनाव के परिणाम को चुनौती देते हुए पूर्व विधानसभा अध्यक्ष एवं भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रेम प्रकाश पांडेय ने वर्ष 2024 में हाईकोर्ट में चुनाव याचिका दायर की थी।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव ने नामांकन पत्र दाखिल करते समय निर्वाचन आयोग के समक्ष कुछ अनिवार्य जानकारियां पूरी तरह प्रस्तुत नहीं कीं। आरोपों के अनुसार, उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स, आय, संपत्ति और लंबित आपराधिक मामलों से संबंधित आवश्यक जानकारी का पूर्ण खुलासा नहीं किया।

याचिकाकर्ता का दावा है कि नामांकन प्रक्रिया के दौरान इन जानकारियों का सही और पूर्ण विवरण देना कानूनन आवश्यक है। इसी आधार पर उन्होंने देवेंद्र यादव के निर्वाचन को चुनौती दी है।

अब आगे क्या होगा?

हाईकोर्ट द्वारा विधायक का आवेदन खारिज किए जाने के बाद अब चुनाव याचिका पर नियमित सुनवाई होगी। अदालत में दोनों पक्ष अपने-अपने साक्ष्य और गवाह प्रस्तुत करेंगे, जिनके आधार पर मामले की सुनवाई आगे बढ़ेगी।

फिलहाल हाईकोर्ट ने चुनाव परिणाम की वैधता या याचिका में लगाए गए आरोपों के गुण-दोष पर कोई अंतिम टिप्पणी नहीं की है। न्यायालय का वर्तमान आदेश केवल इस प्रश्न तक सीमित है कि मामले का निपटारा बिना ट्रायल के किया जा सकता है या नहीं। अदालत ने स्पष्ट किया है कि आरोपों की प्रकृति को देखते हुए विस्तृत ट्रायल आवश्यक है।

इस आदेश के साथ यह स्पष्ट हो गया है कि भिलाई नगर विधानसभा चुनाव से जुड़ा यह मामला अब नियमित न्यायिक प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ेगा और अंतिम निर्णय साक्ष्यों एवं कानूनी परीक्षण के बाद ही लिया जाएगा।

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