
रायपुर, 2 अगस्त 2026। बस्तर के घने जंगलों से निकलकर वहां की समृद्ध जनजातीय संस्कृति और पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था की गूंज अब देश के सर्वोच्च मंच राष्ट्रपति भवन तक पहुंच गई है। नारायणपुर जिले के पारंपरिक मांझी-चालकी और ‘बस्तर पंडुम’ प्रतियोगिता के विजेताओं के एक विशेष प्रतिनिधिमंडल ने नई दिल्ली में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से सौजन्य भेंट कर बस्तर की जीवंत लोक संस्कृति, कला और सदियों पुरानी परंपराओं का परिचय कराया।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में 30 जुलाई 2026 को प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति भवन का दौरा किया। इस दल में ‘बस्तर पंडुम’ प्रतियोगिता के विजेता, पारंपरिक मांझी-चालकी और पद्मश्री सम्मानित कलाकार शामिल थे। प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति को बस्तर की सांस्कृतिक धरोहर, जनजातीय परंपराओं और सामाजिक व्यवस्था की विशेषताओं से अवगत कराया।

इस ऐतिहासिक यात्रा की शुरुआत 27 जुलाई को नारायणपुर से हुई थी, जब नगरपालिका अध्यक्ष इंद्रप्रसाद बघेल ने प्रतिनिधिमंडल को हरी झंडी दिखाकर दिल्ली के लिए रवाना किया। पूरे जिले के लिए यह गर्व का क्षण था, जबकि 30 जुलाई को राष्ट्रपति भवन में बस्तर की संस्कृति को राष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करने का सुनहरा अवसर मिला।
मुलाकात के दौरान ‘बस्तर पंडुम’ की जनजातीय आभूषण विधा की विजेता मुंगड़ी कोर्राम और सुदनी दुग्गा ने पारंपरिक आभूषणों की विशेषताओं और उनके सांस्कृतिक महत्व की जानकारी साझा की। वहीं एड़का परगना के मांझी राजाराम, करंगाल परगना के मांझी सुधवाराम करंगा, गोटाली परगना के मांझी मंगतू राम ध्रुव, नूरदेश परगना के मांझी गुड्डू पोटाई तथा करंगाल परगना के चालकी सोमारू राम ने बस्तर की पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था, सामाजिक संरचना और रीति-रिवाजों से राष्ट्रपति को अवगत कराया।
इस मुलाकात ने न केवल नारायणपुर और पूरे बस्तर संभाग का गौरव बढ़ाया है, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर बस्तर की समृद्ध जनजातीय विरासत को नई पहचान भी दिलाई है। विशेषज्ञों का मानना है कि राष्ट्रपति भवन जैसे प्रतिष्ठित मंच पर बस्तर की कला, संस्कृति और लोक परंपराओं की प्रस्तुति से इनके संरक्षण, संवर्धन और व्यापक प्रचार-प्रसार को नई गति मिलेगी।


