कुपोषण से सुपोषण, खेती से पशुपालन तक: जनकल्याण योजनाओं से नई उम्मीद

रायपुर। छत्तीसगढ़ में सेवा संकल्प अभियान 2026 के दौरान सामने आई विभिन्न कहानियां बता रही हैं कि शासकीय योजनाओं का लाभ जब जरूरतमंद लोगों तक पहुंचता है, तो वह उनके जीवन में प्रत्यक्ष बदलाव का माध्यम बनता है। सुरक्षित आवास, डिजिटल सेवाएं, महिला सशक्तिकरण, पोषण, कृषि, पशुपालन और आजीविका से जुड़ी योजनाओं के जरिए आम नागरिकों को राहत और नए अवसर मिल रहे हैं।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं और नागरिक सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने पर जोर दिया जा रहा है। अभियान के दौरान सरगुजा सहित प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से ऐसे उदाहरण सामने आए हैं, जहां सरकारी योजनाओं ने परिवारों के जीवन को नई दिशा दी है।
पक्के आवास से मिला सुरक्षा और सम्मान
पीएम जनमन के माध्यम से सरगुजा के पहाड़ी कोरवा परिवारों को पक्के आवास का लाभ मिल रहा है। लंबे समय तक कच्चे मकानों में रहने वाले परिवारों के लिए पक्की छत सुरक्षा और सम्मान के साथ बेहतर भविष्य की उम्मीद लेकर आई है। मोहन राम, मोटू राम सहित उदयपुर क्षेत्र के कई परिवारों ने पक्के घर मिलने के बाद राहत और खुशी व्यक्त की।

डिजिटल सेवाओं से आसान हुआ काम
‘सेवा सेतु’ के जरिए विभिन्न शासकीय सेवाओं को डिजिटल मंच पर उपलब्ध कराने से नागरिकों को आवेदन, प्रमाण पत्र और अन्य प्रक्रियाओं में सुविधा मिल रही है। अम्बिकापुर की डॉली गंधर के आधार कार्ड में नाम संबंधी समस्या का समाधान सेवा सेतु के माध्यम से हुआ। इसी तरह सीएम हेल्पलाइन 1076 के जरिए सरगुजा की छात्रा आराधना सिंह की आधार कार्ड में जन्मतिथि सुधार से जुड़ी समस्या का निराकरण किया गया।
महतारी वंदन से महिलाओं को आर्थिक संबल
महतारी वंदन योजना के माध्यम से पात्र महिलाओं को प्रतिमाह आर्थिक सहायता मिल रही है। सरगुजा की राखी इस सहायता का उपयोग अपने बच्चों के पोषण और सिलाई सामग्री की जरूरतों को पूरा करने में कर रही हैं। वहीं बिहान स्व-सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं कृषि, मुर्गी पालन और अन्य आयमूलक गतिविधियों के जरिए आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रही हैं।
अम्बिकापुर की कल्पना सिंह ने समूह से ऋण लेकर खीरे सहित अन्य फसलों की खेती शुरू की, जबकि उदयपुर की मति बाई ने मुर्गी पालन को व्यवसाय बनाया। सरगुजा में ‘छेरी बैंक’ जैसे नवाचार भी महिलाओं को पशुपालन आधारित आजीविका से जोड़ रहे हैं।

बच्चों को कुपोषण से सुपोषण की ओर
अम्बिकापुर के शासकीय रघुनाथ जिला चिकित्सालय स्थित पोषण पुनर्वास केंद्र में गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों के उपचार और पोषण पुनर्वास पर काम किया जा रहा है। शिवाशी, रश्मि, प्रतीक और युवराज जैसे बच्चों के उपचार के दौरान वजन में वृद्धि दर्ज की गई। बच्चों को बेहतर पोषण के साथ उनके माता-पिता को स्वच्छता, स्तनपान, पूरक आहार और वृद्धि निगरानी की जानकारी भी दी जा रही है।
पशुपालन और खेती से बढ़ रहे आय के अवसर
सीतापुर के दयासागर ने पशुपालन विभाग के मार्गदर्शन में कृत्रिम गर्भाधान के माध्यम से नस्ल सुधार अपनाया, जिससे दुग्ध उत्पादन बढ़ा। वहीं लुण्ड्रा के जयनाथ राम ने राष्ट्रीय पशुधन मिशन के सहयोग से बकरी पालन को आजीविका का माध्यम बनाया।
कृषि क्षेत्र में सौर सुजला योजना के तहत सौर सिंचाई पंप मिलने से किसानों को खेती में विविधता लाने का अवसर मिल रहा है। लबेद सिंह जैसे किसान धान के साथ दलहन, तिलहन, सब्जियां, फलदार पौधों और फूलों की खेती कर रहे हैं। कुछ किसान खेती के साथ मछली पालन को भी जोड़ रहे हैं।
योजनाओं से आगे, जीवन में बदलाव बना सुशासन की पहचान
सेवा संकल्प अभियान के दौरान सामने आई कहानियां बताती हैं कि जनकल्याणकारी योजनाओं की सार्थकता उनके प्रावधानों से आगे बढ़कर नागरिकों के जीवन में आए बदलाव से दिखाई देती है। किसी परिवार के लिए पक्का घर, किसी छात्रा के लिए सही दस्तावेज, किसी महिला के लिए आर्थिक संबल, किसी बच्चे के लिए बेहतर स्वास्थ्य और किसी किसान के लिए सिंचाई की सुविधा—ये सभी बदलाव सुशासन को जमीनी स्तर पर प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
अभियान का उद्देश्य शासन की सेवाओं और योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है, ताकि नागरिक केवल योजनाओं के लाभार्थी न रहें, बल्कि बेहतर भविष्य के निर्माण में सक्रिय भागीदार बन सकें।
