माइनिंग से हाई-वैल्यू मैन्युफैक्चरिंग की ओर बढ़ रहा छत्तीसगढ़, 8 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव

रायपुर, 2 सितंबर 2026। खनिज संसाधनों के लिए पहचाने जाने वाला छत्तीसगढ़ अब अपनी औद्योगिक पहचान को बदलते हुए हाई-वैल्यू और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग का केंद्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, फार्मा, इंजीनियरिंग, ऑटो कंपोनेंट्स, रक्षा उपकरण, एआई और ग्रीन स्टील जैसे क्षेत्रों पर फोकस बढ़ाया है।
राज्य की औद्योगिक विकास नीति 2024-30 के तहत स्थानीय संसाधनों के मूल्य संवर्धन के साथ आधुनिक तकनीक आधारित उद्योगों को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। इसका लक्ष्य छत्तीसगढ़ को केवल खनिज आपूर्तिकर्ता के बजाय तैयार उत्पादों और उन्नत तकनीक का प्रमुख केंद्र बनाना है।
8 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव
निवेश प्रोत्साहन पोर्टल के अनुसार पिछले करीब 18 महीनों में राज्य को लगभग 8 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। इनसे 1.5 लाख से अधिक रोजगार के अवसर बनने की संभावना है। एआई, डेटा सेंटर, सेमीकंडक्टर, फार्मा, टेक्सटाइल और एग्रो-प्रोसेसिंग जैसे क्षेत्रों में निवेश प्रस्ताव राज्य की बदलती औद्योगिक दिशा को दर्शाते हैं।
राजनांदगांव में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर (EMC 2.0) को मंजूरी मिली है, जिससे 3,000 करोड़ रुपये से अधिक निवेश और करीब 9,000 रोजगार आने की उम्मीद है।
ग्रीन स्टील और फार्मा पर भी जोर
स्टील उत्पादन के मजबूत आधार वाले छत्तीसगढ़ में अब ग्रीन स्टील पर भी फोकस किया जा रहा है। ग्रीन स्टील डायलॉग के दौरान करीब 13,840 करोड़ रुपये की निवेश प्रतिबद्धताएं सामने आईं।
वहीं, फार्मा क्षेत्र में करीब 992.53 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। सरकार सिंगल विंडो सिस्टम और त्वरित अनुमोदन व्यवस्था के जरिए निवेश परियोजनाओं को जमीन पर उतारने की दिशा में काम कर रही है।
छत्तीसगढ़ अब अपने खनिज, ऊर्जा और औद्योगिक आधार का इस्तेमाल कच्चे संसाधनों से आगे बढ़कर उच्च मूल्य वाले उत्पादों के निर्माण में करने की रणनीति पर आगे बढ़ रहा है।




