भिलाई नगर निगम का पेवर ब्लॉक घोटाला: 9 बड़े अफसर रडार पर, नोटिस के बाद मचा हड़कंप

रायपुर। भिलाई नगर निगम में पेवर ब्लॉक निर्माण कार्यों में सामने आए कथित 12.66 करोड़ रुपये के घोटाले की जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। उप अभियंताओं और ठेकेदारों के बाद अब निगम ने 9 वरिष्ठ अधिकारियों को नोटिस जारी कर उनका अभिमत मांगा है। अधिकारियों के जवाब के बाद ही मामले में जिम्मेदारी और अनियमितताओं की स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।
निगम की ओर से जारी नोटिस में कार्यपालन अभियंता कुलदीप गुप्ता, बीके वर्मा, रवि सिन्हा, अखिलेश चंद्राकर और संजय बागड़े के अलावा सहायक अभियंता अरविंद शर्मा, वसीम खान, आलोक पसीना और आरएस राजपूत शामिल हैं।
33 कार्यों की फाइलों की जांच
पेवर ब्लॉक से जुड़े कुल 33 कार्यों की फाइलों की जांच की जा रही है। इनमें से 29 फाइलों का परीक्षण पूरा होने की जानकारी सामने आई है। वहीं, अन्य फाइलें मिलने के बाद उनका परीक्षण लोक निर्माण विभाग से कराने की तैयारी की जा रही है।
वर्ष 2023 में इन कार्यों से जुड़े 19 ठेकेदारों को भी नोटिस जारी कर अभिमत मांगा गया है। अधिकारियों और ठेकेदारों के जवाब मिलने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
नोटिस के बाद बढ़ी हलचल
मामले में ठेकेदारों के प्रतिनिधिमंडल ने निगम आयुक्त से मुलाकात कर नोटिस जारी करने का कारण पूछा। आयुक्त ने उन्हें जांच की प्रक्रिया के संबंध में जानकारी दी। अधिकारियों का पक्ष सामने आने के बाद यह स्पष्ट होगा कि निर्माण कार्यों में किस स्तर पर अनियमितता हुई और उसकी जिम्मेदारी किसकी बनती है।
इधर, कुछ उप अभियंताओं के जांच के दौरान ठेकेदारों के बिल तैयार करने और कार्यों की माप प्रक्रिया से दूरी बनाने की बात सामने आई है। उनका तर्क है कि जांच के दौरान यदि किसी कार्य में कमी पाई जाती है तो भविष्य में जिम्मेदारी तय हो सकती है। वहीं ठेकेदारों का कहना है कि माप और बिल प्रक्रिया प्रभावित होने से त्योहारी सीजन से पहले भुगतान में देरी हो सकती है।
शिकायत के बाद शुरू हुई थी जांच
पेवर ब्लॉक कार्यों को लेकर भाजपा पार्षद संतोष मौर्य ने सांसद विजय बघेल से शिकायत की थी। सांसद ने मामले की जांच के लिए कलेक्टर को पत्र लिखा था। इसके बाद कलेक्टर के निर्देश पर लोक निर्माण विभाग और ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के कार्यपालन अभियंताओं को शामिल कर जांच टीम गठित की गई।
जांच रिपोर्ट के आधार पर कलेक्टर ने निगम आयुक्त को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। अब अधिकारियों और ठेकेदारों के जवाब के बाद मामले में आगे की कार्रवाई की तस्वीर साफ होगी। शिकायतकर्ता की ओर से घोटाले की राशि और बढ़ने का दावा किया जा रहा है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।